युद्ध-विरोधी काव्य और भारतीय सभ्यता के अर्थ पर केंद्रित रहा महाभारत समागम का चौथा दिन

भोपाल। वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित महाभारत समागम के चौथे दिन विश्व की प्रमुख सभ्यताओं के संघर्ष, औदार्य और मानवीय करुणा पर केंद्रित सत्र संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विस्‍साव शिम्‍बोर्स्‍का, पाब्‍लो नेरूदा, बोरिस पास्तरनाक, नाजिम हिकमत सहित विश्वविख्यात कवियों की युद्ध-विरोधी रचनाओं का प्रभावशाली पुनर्पाठ किया गया। न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी, डॉ. संतोष चौबे, जयंत देशमुख, राजेन्द्र गुप्त सहित विद्वानों ने कविता पाठ के माध्यम से शांति का संदेश दिया।

‘भारत होने का अर्थ’ विषय पर डॉ. वसंत शिंदे, डॉ. शिवाकांत वाजपेयी सहित वक्ताओं ने विचार रखे। पूर्वरंग सत्र में मयूरभंज शैली में कर्णवध नृत्य-नाटिका और अंतरंग सभागार में कनुप्रिया नाटक ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।

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