खंडवा: जिला न्यायालय ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर 10 साल तक सरकारी नौकरी करने वाले हॉस्टल अधीक्षक मोहन सिंह काजले को तीन साल के कठोर कारावास और 27 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। इस मामले में मोहन सिंह की सास भगवती बाई को भी दोषी पाया गया है क्योंकि उन्होंने पुलिस जांच के दौरान सबूत मिटाने की नीयत से फर्जी मार्कशीट को फाड़ दिया था, जिसके लिए उन्हें छह माह की जेल और दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा मिली है।
अभियोजन के अनुसार मोहन सिंह ने स्नातक की फर्जी अंकसूची के जरिए खरगोन जिले में शासकीय नौकरी हासिल की थी और एक दशक तक सेवा में रहा। धोखाधड़ी का खुलासा होने पर दिसंबर 2020 में सिटी कोतवाली पुलिस ने जालसाजी और सबूत नष्ट करने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी खालवा भाग गया था जहां उसे आदिम जाति कल्याण विभाग ने हॉस्टल अधीक्षक का प्रभार दे दिया था, लेकिन बाद में शिकायत मिलने और विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने पर उसे निलंबित कर दिया गया। अब कोर्ट का फैसला आने के बाद संबंधित विभाग उसे सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई कर रहा है।
