सलामतपुर: कस्बे में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आज अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक माहौल में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र सुदामा के चरित्र का मार्मिक वर्णन हुआ, जिसने हजारों श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। राष्ट्रीय कथा व्यास पंडित देवेन्द्र भार्गव महाराज ने सुदामा चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, निस्वार्थ भक्ति और संतोष की महिमा का बखान किया। कथा के सातवें और समापन दिवस पर मुख्य प्रसंग सुदामा चरित्र रहा।
आचार्य जी ने बताया कि गरीबी में भी संतुष्ट सुदामा जब द्वारिका पहुंचे तो भगवान कृष्ण ने उन्हें राजसी स्वागत दिया। सुदामा द्वारा लाए एक मुट्ठी चिवड़े को प्रेमपूर्वक ग्रहण कर श्रीकृष्ण ने दिखाया कि सच्ची भक्ति और मित्रता में धन-दौलत का कोई स्थान नहीं होता। “संतोष ही परम धन है, जो व्यक्ति जीवन में संतुष्ट रहता है, वही सच्चा धनवान है,” आचार्य ने कहा। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद भक्त भाव-विभोर हो उठे, कई श्रद्धालुओं के नेत्र सजल हो गए।
