मुंबई, 20 फरवरी (वार्ता) अभिनेता इकबाल खान का कहना है कि दूसरा मौक़ा ज़िंदगी को नए नज़रिए से जीने का अवसर देता है। सोनी सब अपना नया शो ‘यादें’, लेकर आ रहा है, जो कि दुनिया भर में सराहे गए इटैलियन सीरीज़ डीओसी – नेले ट्यू मनी का भारतीय रूपांतरण है। कई देशों में सफलतापूर्वक अपनाए गए इस शो की कहानी ज़िंदगी, प्यार और पहचान में मिलने वाले दूसरे मौक़ों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। शो में दिखाया गया है डॉ. देव (इक़बाल ख़ान) का असाधारण सफ़र, जो एक हादसे के बाद अपनी आठ साल की यादें खो देता है और फिर अपनी दुनिया को नए सिरे से बनाता है।
इक़बाल ख़ान के लिए “दूसरे मौक़े” का विचार बेहद व्यक्तिगत है। इस विषय पर बात करते हुए उन्होंने अपनी एक करीबी दोस्त की कहानी साझा की, जिसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई जब उसे दूसरा मौक़ा मिला। इक़बाल को सबसे ज़्यादा छू गया वो पल नहीं जब उसकी दोस्त को नया अवसर मिला, बल्कि वो सफ़र जो उसके बाद शुरू हुआ। उनकी दोस्त ने अपनी पुरानी ज़िंदगी में लौटने की कोशिश नहीं की, बल्कि नए ढंग से आगे बढ़ने का फ़ैसला किया। उसका नज़रिया बदल गया। उसने अपनी रफ़्तार धीमी कर दी और ज़्यादा सजग होकर जीना शुरू किया। खाने-पीने से लेकर समय बिताने और अपने आसपास के लोगों तक, उसकी हर पसंद सोच-समझकर होने लगी। धीरे-धीरे उसने पुरानी आदतों और नकारात्मकता को छोड़ दिया, जो अब उसकी ज़िंदगी में कोई मायने नहीं रखती थीं, और उसने वर्तमान में रहकर ज़्यादा जागरूकता के साथ जीना शुरू किया।
इकबाल खान ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “दूसरे मौक़े का विचार मेरे लिए बेहद निजी है। हम अक्सर सोचते हैं कि दूसरा मौक़ा मतलब अतीत को सुधारना। लेकिन असल में दूसरा मौक़ा आपको ज़िंदगी को नए नज़रिए से जीने का अवसर देता है। यह आपको बेहतर और ज़िम्मेदार इंसान बनने का मौक़ा देता है। यही मैंने अपनी दोस्त के अनुभव से सीखा और यही मेरा किरदार डॉ. देव भी ‘यादें’ में महसूस करता है। आठ साल की यादें खोने के बाद उसे अपनी ज़िंदगी फिर से बनानी पड़ती है और एक बेहतर इंसान और ज़्यादा दयालु डॉक्टर बनना पड़ता है।

