पूंजीगत व्यय और सामाजिक सुरक्षा में संतुलन की कोशिश

मध्य प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को इस वर्ष का बजट पेश किया. बजट केवल राजकोषीय दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह राज्य की बदलती आर्थिक मानसिकता का घोषणापत्र है. कभी ‘बीमारू’ कहे जाने वाले इस प्रदेश ने अब अपने आर्थिक संकेतकों के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक विकास की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है. प्रस्तुत बजट का आर्थिक आधार यह संकेत देता है कि ‘विकसित मध्य प्रदेश’ केवल नारा नहीं, बल्कि ठोस रणनीति का परिणाम है. सबसे पहले यदि आय के स्तर को देखा जाए, तो प्रति व्यक्ति आय का 38,497 रुपए से बढक़र 1,69,050 रुपए तक पहुंचना केवल सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का द्योतक है. लगभग 339 फीसदी की वृद्धि यह बताती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ा है और आम नागरिक की क्रय शक्ति मजबूत हुई है. लाड़ली बहना योजना और किसान सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजनाओं ने ग्रामीण और निम्न मध्यम वर्ग की आय में स्थिरता दी है. जब आय बढ़ती है, तो खपत बढ़ती है, और खपत आर्थिक चक्र को गति देती है. यही आर्थिक चक्र अब मध्य प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.

दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष संतुलित विकास का है. बजट में कृषि, उद्योग और सेवा,तीनों क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास सराहनीय है. कृषि अभी भी 43 फीसदी के साथ सकल राज्य मूल्य वर्धन की रीढ़ बनी हुई है. किंतु अब कृषि को पारंपरिक ढांचे से निकालकर सोलर पंप, डेयरी विस्तार और मूल्य संवर्धन की दिशा में ले जाया जा रहा है. यह संकेत है कि सरकार केवल उत्पादन नहीं, बल्कि उत्पादकता और आय बढ़ाने पर ध्यान दे रही है.

सेवा क्षेत्र की 37 फीसदी हिस्सेदारी और लगभग 15.80 फीसदी की वृद्धि दर यह दर्शाती है कि शहरीकरण, पर्यटन और आईटी आधारित सेवाओं का विस्तार राज्य की नई पहचान बन रहा है. यह बदलाव दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है, क्योंकि सेवा क्षेत्र रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि दोनों में सहायक होता है. उद्योगों के लिए 1.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य निजी निवेश आकर्षित करने में सफल हो रहा है.

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजकोषीय अनुशासन का है. 4.38 लाख करोड़ रुपए से अधिक के बजट आकार के बावजूद राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना आर्थिक प्रबंधन की परिपक्वता को दर्शाता है. 13.5 फीसदी की कर राजस्व वृद्धि बिना नए कर लगाए राज्य की कर-संग्रह क्षमता में सुधार का प्रमाण है. वहीं 31.3 फीसदी का ऋण- जीडीपी अनुपात यह संकेत देता है कि उधारी नियंत्रित है और भविष्य के बुनियादी ढांचा निवेशों के लिए वित्तीय गुंजाइश उपलब्ध है.

पूंजीगत व्यय और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता है. जहां एक ओर सडक़ों, सिंचाई, ऊर्जा और शहरी ढांचे पर निवेश बढ़ाया गया है, वहीं सामाजिक योजनाओं के माध्यम से कमजोर वर्गों को सुरक्षा कवच भी दिया गया है. ‘नो न्यू टैक्स’ की नीति मध्यम वर्ग को राहत देती है और उपभोग को प्रोत्साहित करती है.

यदि राज्य 11.14 फीसदी की वृद्धि दर को बनाए रखने में सफल रहता है, तो वह राष्ट्रीय परिदृश्य में सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. यह बजट संकेत देता है कि मध्य प्रदेश अब केवल संसाधनों का प्रदेश नहीं, बल्कि अवसरों का प्रदेश बन रहा है. आर्थिक आत्मविश्वास की यह यात्रा ही उसे वास्तविक अर्थों में ‘आर्थिक पावरहाउस’ बना सकती है.

 

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