विपक्ष की एकजुटता ने विफल की सरकार की विभाजनकारी राजनीति: कांग्रेस

भोपाल। कांग्रेस ने सोमवार को संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने को “लोकतंत्र और संविधान की जीत” करार दिया। पार्टी का दावा है कि विपक्ष की एकजुटता ने केंद्र सरकार के उस प्रयास को विफल कर दिया, जिसके जरिए परिसीमन के माध्यम से सत्ता को अपने पक्ष में करने की योजना बनाई जा रही थी।

पार्टी नेताओं के अनुसार, विधेयक पर हुई वोटिंग ने “विभाजनकारी राजनीति” के प्रति जनता के अस्वीकार को उजागर किया। कुल 528 मतों में से 298 मत पक्ष में और 230 मत विरोध में पड़े, जिसके चलते विधेयक पारित नहीं हो सका। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करती है, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ने का विरोध करती है।

कांग्रेस ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि उसने सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन किया था और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में हमेशा अग्रणी रही है। पार्टी ने 1989 में पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखने से लेकर 1990 के दशक में स्थानीय निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाले संवैधानिक संशोधनों को आगे बढ़ाने का उल्लेख किया।

पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार का मौजूदा दृष्टिकोण आरक्षण के क्रियान्वयन में देरी करने और चुनावी गणित को प्रभावित करने के उद्देश्य से प्रेरित है। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही तत्काल आरक्षण लागू किया जाए, ओबीसी महिलाओं के लिए उप-कोटा सुनिश्चित किया जाए और इसे जनगणना व परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखा जाए।

कांग्रेस ने इसे अधिकार और प्रतिनिधित्व की व्यापक लड़ाई बताते हुए कहा कि देश की महिलाएं अब और इंतजार करने को तैयार नहीं हैं तथा सरकार को बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने चाहिए।

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