हंसी से लोटपोट करने वाले दृश्यों के पीछे थी घंटों की मेहनत : मनीष पॉल

मुंबई, 07 जून (वार्ता) अभिनेता मनीष पॉल ने कहा है कि फिल्म है जवानी तो इश्क होना है के हास्य और भ्रम से भरे दृश्यों को पर्दे पर सहज दिखाने के लिए कलाकारों को घंटों अभ्यास और कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इन दिनों सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है जवानी तो इश्क होना है दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर रही है। फिल्म की सबसे चर्चित विशेषताओं में डेविड धवन शैली की हास्यपूर्ण गलतफहमियों और भ्रमों से भरी कहानी शामिल है। गलत पहचान, तेज रफ्तार घटनाक्रम, एक के ऊपर एक बोले गए झूठ और सही समय पर उत्पन्न होने वाली गलतफहमियों से सजी यह फिल्म पारंपरिक बॉलीवुड कॉमेडी का स्वाद दर्शकों को फिर से दे रही है।

दर्शक जहां फिल्म के मनोरंजक भ्रम दृश्यों का आनंद लेते हुए हंसी से लोटपोट हो रहे हैं, वहीं मनीष पॉल ने बताया कि इन दृश्यों को फिल्माने में काफी मेहनत और सटीकता की आवश्यकता पड़ी।

मनीष पॉल ने कहा कि पर्दे पर ये दृश्य भले ही सहज और स्वाभाविक दिखाई देते हों, लेकिन प्रत्येक गतिविधि, संकेत और प्रतिक्रिया की पहले से बारीकी से योजना बनाई गई थी तथा उन्हें बेहतर बनाने के लिए बार-बार अभ्यास किया गया।

फिल्म की शूटिंग के दौरान आने वाली चुनौतियों को याद करते हुए मनीष पॉल ने कहा, “लोग ऐसे हास्य दृश्यों को देखकर सोचते हैं कि हम सिर्फ मौज-मस्ती कर रहे हैं, लेकिन वास्तविकता में सेट पर काफी अफरा-तफरी का माहौल होता है। डेविड धवन की हास्य शैली घड़ी की तरह सटीक समय पर आधारित होती है। यदि कोई कलाकार एक सेकंड भी देर कर दे या कोई संकेत छूट जाए तो पूरा दृश्य प्रभावित हो सकता है। इसके लिए अत्यधिक एकाग्रता, ऊर्जा और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। जब अंत में डेविड जी ‘कट, ओके’ कहते थे तो पूरी टीम थककर बैठ जाती थी, लेकिन माहौल हंसी-मजाक से भरा रहता था।”

मनीष पॉल का मानना है कि फिल्म की सफलता का बड़ा कारण इसकी परिस्थितिजन्य कॉमेडी और कलाकारों के बीच तालमेल है। उनकी शानदार हास्य प्रस्तुति को भी दर्शकों की सराहना मिल रही है।

मनीष पॉल जल्द ही वन : फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट, रफू और निर्देशक विक्रम फडणिस की एक अन्य फिल्म में नजर आएंगे।

 

 

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