
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की विभिन्न नवीन अध्ययनशालाओं में वर्षों से प्रतीक्षित शिक्षकों के स्थाई पदों की पूर्ति का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। यह उपलब्धि कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कार्यपरिषद सदस्य डॉ. राजेश सिंह कुशवाह के विशेष प्रयासों से संभव हुई है, जिनके द्वारा प्रस्तुत युक्तियुक्तकरण के प्रस्ताव को कार्यपरिषद की आपात बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। विश्वविद्यालय, में शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय की नवीन अध्ययनशालाओं में जल्द ही शिक्षकों के स्थाई पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह निर्णय कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज की अध्यक्षता में आयोजित कार्यपरिषद की महत्वपूर्ण आपात बैठक में लिया गया। कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के तहत कई नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। इन नवीन विषयों में शिक्षकों की स्थाई कमी को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक व्यावहारिक समाधान निकाला है जिसके अंतर्गत युक्तियुक्तकरण करके विश्वविद्यालय के वर्तमान शिक्षक पदों की पुनर्संरचना कर उन्हें नवीन अध्ययनशालाओं के अनुसार व्यवस्थित किया जा रहा है। डॉ. शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में अनेक नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का संचालन प्रारंभ किया गया है। जिसमें देशभर से विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया।
भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा
बैठक में कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज के साथ कार्यपरिषद सदस्य डॉ. राजेश सिंह कुशवाह, रूपचन्द पमनानी, वरुण गुप्ता, डॉ. मंजूषा मिमरोट और डॉ. संजय वर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस संबंध मे कुलगुरु प्रो अर्पण भारद्वाज का कहना है कि विश्वविद्यालय में नवीन विषयों के प्रति विद्यार्थियों का उत्साह जबरदस्त है। जो संस्थान के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
