उदयपुर, 27 फरवरी (वार्ता) कुछ बुरी आदतों एवं व्यायाम नहीं कर पाने के कारण 30 वर्ष से कम उम्र के 30 प्रतिशत लोगों में घुटनों की समस्याएं सामनेआ रही हैं। किसी भी जोड़ के घिसने पर उससे होने वाले दर्द को ओस्टियो आर्थराईटिस कहा जाता है।
प्रख्यात रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जन डॉ.आशीष सिंघल ने कहा है कि घुटनों में दर्द होने की शुरूआत होने पर तुरन्त संबधित चिकित्सक से परामर्श लेने पर घुटनों को और अधिक खराब होने से रोका जा सकता है।
डा सिंघल शुक्रवार को यहां रोटरी क्लब उदयपुर द्वारा रोटरी बजाज भवन में आयोजित घुटने की बीमारियों के बारे में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ बुरी आदतों एवं व्यायाम नहीं कर पाने के कारण 30 वर्ष से कम उम्र के 30 प्रतिशत रोगियों में घुटनों की समस्याएं सामनें आ रही हैं। किसी भी जोड़ के घिसने पर उससे होने वाले दर्द को ओस्टियो आर्थराईटिस कहा जाता है।
डॉ. सिंघल ने कहा कि घुटनों में दर्द, मोडने पर घुटनों में आवाज आती है तो ओस्टियो आर्थराईटिस की शुरूआत कही जाती है। घुटना ओस्टियो आर्थराईटिस में उम्र, आनुवांशिकी एवं वजन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जिसमें आयु एवं आनुवांशिकी के अलावा वजन कम करना आपके हाथ में रहता है। इस पर पूरा ध्यान देना चाहिये।
उन्होंने कहा कि कार्टिलेज घिसने पर घुटनों का दर्द बढ़ जाता है। लगभग 97 प्रतिशत रोगियों को घुटनों के अन्दर की ओर दर्द शुरू हो जाता है। घुटनों की सर्जरी से बचने के लिये वजन कम करना महत्वपूर्ण है। एक किग्रा वजन कम करने पर सात गुना बल कम हो जाता है। इसके लिये साइकिल चलाना चाहिये। घुटना दर्द रोगी को नीचे बैठने से परहेज करना चाहिये।
उन्होंने कहा कि घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी में रोबोटिक सर्जरी के परिणाम काफी सकारात्मक रहते है। विगत दो वर्ष में यहां 1600 से अधिक रोबोटिक घुटना सर्जरी हुई है। उन्होंने कहा कि जीवन में सही खाना खायें, मोबाईल का उपयोग कम करें। चलना और दौड के साथ ही नियमित व्यायाम करना चाहिये।
