नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (वार्ता) इस साल 31 मार्च को समाप्त तिमाही में देश के सर्राफा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला और पहली बार सोने की निवेश मांग ने आभूषण बनाने के लिए सोने की खरीद को पीछे छोड़ दिया है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में सिक्कों, बिस्कुट और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में मजबूत रुचि के कारण निवेश के लिए पीली धातु की खरीद में तेज बढ़ोतरी हुई। दूसरी तरफ, आभूषण मांग में गिरावट देखी गयी। सोने की ऊंची कीमतों के कारण सर्राफा की मांग प्रभावित हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में निवेश मांग साल-दर-साल 52 प्रतिशत बढ़कर 82 टन हो गयी, जबकि आभूषण खपत 19.5 प्रतिशत घटकर 66 टन रह गयी। कुल मिलाकर देश में सोने की मांग 10.2 फीसदी बढ़ी और 151 टन पर पहुंच गयी। डब्ल्यूजीसी का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में यह रुझान और तेज होने की संभावना है, क्योंकि खुदरा और वित्तीय निवेशक दोनों ही इस कीमती धातु में निवेश बढ़ा रहे हैं।
मार्च तिमाही में कुल सोना खपत में निवेश की हिस्सेदारी 54.3 प्रतिशत रही, जो लीक से काफी हटकर है, जहां यह आमतौर पर कुल मांग का लगभग एक-चौथाई होती थी। घरेलू सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से एक तरफ निवेश की मांग बढ़ी है तो दूसरी तरफ इसी वजह से आभूषण की मांग में कमी आयी है। पीली धातु की कीमत साल 2025 की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो चुकी है। गोल्ड ईटीएफ इस बदलाव का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इस उपकरण में निवेश साल-दर-साल 186 फीसदी बढ़कर मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 20 टन हो गया। विश्लेषकों का मानना है कि शेयर बाजार की अस्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती पसंद के कारण यह उछाल आया है।

