भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में केवल कूटनीतिक मित्रता तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि वे एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया फ्रांस यात्रा ने इन संबंधों में नई गर्मजोशी और विश्वास का संचार किया है. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने 13 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जो आने वाले वर्षों में तकनीक, नवाचार, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देंगे. इन समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग की है. दोनों देशों ने ‘भारत-फ्रांस एआई वर्किंग ग्रुप’ के गठन पर सहमति जताई है. इसका उद्देश्य एआई अनुसंधान, नवाचार और जिम्मेदार उपयोग के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देना होगा. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था और शासन प्रणाली को प्रभावित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बन चुकी है.
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों ने अपने सहयोग को नई ऊंचाई देने का निर्णय लिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी के बीच मानव अंतरिक्ष अभियानों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है. शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. फ्रांस के विश्वविद्यालय अब नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत भारतीय संस्थानों में अपने कैंपस स्थापित कर सकेंगे. वहीं, पेरिस के प्रतिष्ठित सैक्ले विश्वविद्यालय में ‘एआई, नवाचार और संस्कृति’ विषय पर विशेष पीठ स्थापित की जाएगी. इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डिजिटल विज्ञान केंद्रों की स्थापना भी की जाएगी.
स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पेरिस के विश्व प्रसिद्ध स्टार्टअप केंद्र ‘स्टेशन एफ’ में दस अतिरिक्त भारतीय स्टार्टअप को शामिल करने का निर्णय लिया गया है. इससे भारतीय नवाचारों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा और दोनों देशों के युवा उद्यमियों के बीच सहयोग मजबूत होगा.
आर्थिक क्षेत्र में दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र बनाया जाएगा. साथ ही आर्थिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर भी सहमति बनी है. विमानन, रेलवे और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशे जाएंगे. फ्रांस में यूपीआई भुगतान प्रणाली के विस्तार का निर्णय भी भारत की डिजिटल ताकत को वैश्विक पहचान दिलाने वाला कदम है.
सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा से जुड़े समझौते ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को और मजबूत किया है.
स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भारत-फ्रांस संबंधों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नया आकार देने वाली पहल साबित हुई है. नवाचार, तकनीक, शिक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग इस बात का संकेत है कि दोनों देश 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना साझेदारी के साथ करना चाहते हैं. यह मित्रता अब केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि भविष्य की साझी प्रगति की आधारशिला बनती दिखाई दे रही है.
