गौशालाओं के नाम पर हर माह हो रहा करोड़ो रूपए का घोटाला

सतना:गौशालाओं में आवारा गौवंश पशुओं के रखरखाव के नाम पर सतना और मैहर जिले के गौशाला संचालाकों द्वारा उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा की आपसी मिली भगत में और विकासखण्ड स्तरीय विटनरी चिकित्सकों के प्रमाणीकरण के साथ हर माह करोड़ो रूपए का फर्जीवाड़ा कर काली कमाई की जा रही है और शासन  को राजस्व का चूना लगा रहे है।
यह बात काग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप मिश्रा पूर्व शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद,पूर्व विधायक कल्पना वर्मा और पूर्व उपाध्यक्ष रमाशंकर पयासी ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में कही.

श्री मिश्रा ने बताया कि अवारा गौवंशों खासकर जो असहाय, अपाहिज, बांझ, जिनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं है ऐसे पशुओं की देखरेख व चारा-भूसा पानी आदि सहित पर्याप्त भरण पोषण के लिए जिले भर में गौशालाएं बनाई गई हैं। इन गौशालाओं को शासन द्वारा ऐसे प्रति गौवंश 40 रूपए प्रतिदिन उनके भरण पोषण के लिए दिया जाता है। जिले में वर्तमान में 59 गौशालाएं संचालित है, जिनमें 14 हजार 701 पशु रजिस्टर्ड है। 40 रूपए प्रतिदिन के मान से उनके भरण पोषण के लिए एक माह में 1 करोड़ 76 लाख 41 हजार 200 रूपए शासन गौशाला संचालकों को दे रहा है।
कौन कितने गौशाला चला रहा 
शासन के निर्देशानुसार जिले में संचालित 59 गौशालाएं में मुख्यमंत्री गौसेवा योजना मनरेगा अन्तर्गत स्वसहायता समूहों द्वारा 31, ग्राम पंचायतों द्वारा 11, दो अन्य समाजसेवी एवं अशासकीय संस्थाओं जिन्हे एनजीओ कहा जा सकता है उनके द्वारा 15 गौशालाएं जिले में संचालित हो रही हैं।  स्व सहायता समूहों को  42,28,800 रूपए, ग्राम पंचायत को 16,34,400 रूपए एवं अन्य अशासकीय संस्थाओं द्वारा संचालित गौशालाओं को 1,15,28,500 रू. की राशि उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा के प्रस्ताव के आधार पर जिला कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर शासन द्वारा जारी की जाती है।

लेकिन सतना एवं नैहर जिले में आज तक किसी भी अधिकारी ने गौवंश के नाम पर हो रहे घोटाले की ओर देखने का प्रयास नहीं किया है। यह तो सिर्फ सतना जिले की बात है। इसी तरह मैहर जिले में भी गौशालाएं आवारा पशुओं के रखरखाव के नाम पर संचालित है और गौवंश रखने के नाम पर सरकार की सरपरस्ती पर फर्जी रूप से करोड़ों रूपए की राशि हर माह आहरित हो रही है व कागजों पर गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है। गौशालाओं के नाम पर आहरित हो रही राशि में सरकार के नेताओं से लेकर अधिकारियों तक का खुले रूप में संरक्षण प्राप्त है एवं छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक इस घोटाले में संलिप्त हैं।
खर्च मात्र बीस प्रतिशत
गौवंशों के पालन पोषण के लिये प्रति दिन 40 रू. के हिसाब से प्रति माह प्रति मवेशी 1200 रूपये दिए जाते हैं जबकि वास्तविक रूप से लगभग 20 प्रतिशत की राशि ही गौवंशों के नाम से खर्च की जाती है। गौशालाओं में रजिस्टर्ड मुताबिक गौवंश भी नहीं हैं। इस हिसाब से लगभग 80 प्रतिशत की राशि में गौशालाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है। यानि कि लगभग 1 करोड़ 41 लाख 12 हजार 960 रूपए प्रतिमाह का घोटाला सामने आ रहा है और जिले के जन प्रतिनिधि एवं अधिकारी जिले में हो रहे इस घोटाले पर चुप्पी साध कर बैठे हैं।
इसके पीछे किसका खेल
जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के पूर्व अध्यक्ष दिलीप मिश्रा शनिवार को सर्किट हाउस में प्रेस कान्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि इस पूरे घोटाले के खेल को अमली जामा उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाओं की सरपरस्ती में विकासखण्ड स्तरीय विटनरी चिकित्सकों के प्रमाणीकरण के साथ हो रहा है और यह विगत पांच साल से ऊपर से लगातार जारी है। शासन के निर्देशानुसार गौशालाओं में गौवंश होने व चारा भूषा उपलब्ध होने का वेरीफिकेशन-प्रमाणीकरण विकासखण्डों में पदस्थ चिकित्सक करते हैं और इसके एवज में फर्जी रूप से किए गए प्रमाणीकरण की सुविधा शुल्क 5000 रु. प्रति गौशाला प्रति माह गौशाला संचालकों से विकासखण्ड के पशु चिकित्सकों द्वारा लिए जाते हैं और इन्हीं पशु चिकित्सकों के प्रतिवेदन एवं उप संचालक की अनुशंसा के आधार पर संबंधित संस्थाओं को राशि रिलीज की जाती है।
इनकी मांग
पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने शासन से मांग है कि गौवंशों के रख-रखाव के लिए जिले की गौशालाओं को जारी की जा रही राशि की जांच के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम बनाई जाए एवं दोषियों के खिलाफ  अपराधिक प्रकरण दर्ज कर राशि वसूली की कार्यवाही की जाए।

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