विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने जीते 102 स्वर्ण सहित 114 पदक

अहमदाबाद, 08 जून (वार्ता) भारतीय खिलाड़ियों ने सोमवार को यहां ईकेए एरिना में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदकों की झड़ी लगाते हुए कुल 114 पदकों के साथ प्रतियोगिता का शानदार समापन किया। इसमें 102 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

पदक तालिका में जापान तीन स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वहीं अर्जेंटीना ने तीसरा स्थान हासिल किया, जिसका श्रेय काफी हद तक उसकी एकमात्र प्रतिनिधि नाबिला बर्राजा को जाता है। बर्राजा ने अकेले ही दो स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर अपनी टीम को शीर्ष तीन में पहुंचाया। पदक तालिका में नेपाल पांचवें स्थान पर रहा, लेकिन कुल पदकों की संख्या के लिहाज से वह भारत के बाद दूसरा सबसे सफल दल साबित हुआ। नेपाल ने एक स्वर्ण, 36 रजत और 15 कांस्य सहित कुल 52 पदक अपने नाम किए।

उज्बेकिस्तान ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण, 13 रजत और 11 कांस्य सहित कुल 25 पदक जीते और प्रतियोगिता के सबसे सफल देशों में शामिल रहा। पहली बार आयोजित इस विश्व योगासन चैंपियनशिप में दुनिया भर के कुल 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें से 31 देशों के खिलाड़ियों ने कम से कम एक पदक जीता। इनमें से 10 देशों ने कम से कम एक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप एक ऐतिहासिक आयोजन साबित हुई। वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने वाले इस शहर में आयोजित इस प्रतियोगिता ने योगासन के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव स्थापित किया। इसने भारत की प्राचीन योग परंपरा को एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी खेल विधा के रूप में स्थापित करने की दिशा में नया आयाम जोड़ा और ओलंपिक आंदोलन के अंतर्गत इसकी मान्यता के मार्ग को भी सशक्त बनाया।

मेजबान भारत ने प्रतियोगिता में 122 सदस्यीय दल उतारा था। खिलाड़ियों ने छह आयु वर्गों में प्रतिस्पर्धा की, जिनमें सब-जूनियर पुरुष एवं महिला (10-14 वर्ष), जूनियर पुरुष एवं महिला (14-18 वर्ष), सीनियर (18-28 वर्ष), सीनियर-ए (28-35 वर्ष), सीनियर-बी (35-45 वर्ष) तथा सीनियर-सी (45-55 वर्ष) शामिल थे।

विश्व योगासन के अध्यक्ष योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने अपने वीडियो संदेश में कहा, “विश्व योगासन चैंपियनशिप कोई मंजिल नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन का प्रारंभ है। योग केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है। यह स्वास्थ्य, सामंजस्य, शांति और मानव एकता का मार्ग है। यहां उपस्थित प्रत्येक खिलाड़ी केवल चैंपियन नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में योग का दूत है। आज हम पदकों और विजेताओं का उत्सव मना रहे हैं, लेकिन कल हमें योग के माध्यम से जुड़े हुए विश्व का निर्माण करना होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि यहां से शुरू हुई यह यात्रा एक दिन योगासन को ओलंपिक मंच तक पहुंचाएगी और दुनिया भर की पीढ़ियों को प्रेरित करेगी।”

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