सीहोर। अक्षय तृतीया (आखातीज) जैसे शुभ मुहूर्त पर जहां जिलेभर में शादियों की धूम रहती है, वहीं इस बार सीहोर प्रशासन ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा पर सख्त प्रहार करते हुए तीन गांवों में समय रहते कार्रवाई करते हुए तीन नाबालिगों की शादियां रुकवा दीं हैं.
कलेक्टर बालगुरू के. के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष निगरानी अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यह सफलता हासिल की. इस अभियान ने न केवल कानून का पालन सुनिश्चित किया, बल्कि तीन नाबालिगों का भविष्य भी सुरक्षित कर दिया.
पहला मामला ग्राम दिवडिय़ा का है, जहां 20 अप्रैल को आखातीज के अवसर पर एक नाबालिग बालिका का विवाह तय किया गया था. सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, पटवारी, सरपंच और ग्राम कोटवार की टीम तत्काल मौके पर पहुंची. जांच में पाया गया कि 21 वर्षीय युवक का विवाह 17 वर्षीय बालिका से कराया जा रहा था, जो बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है. टीम ने मौके पर ही परिजनों को कानून के प्रावधानों से अवगत कराया और बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं भविष्य पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों को विस्तार से समझाया. प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और दोनों पक्षों ने सहमति देते हुए बालिका की 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक विवाह स्थगित करने का निर्णय लिया.
दूसरा मामला ग्राम धनखेड़ी में सामने आया, जहां जिला स्तरीय कंट्रोल रूम को बाल विवाह की सूचना प्राप्त हुई थी. सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और मौके पर पहुंची. जांच में पाया गया कि जिस बालक का विवाह किया जा रहा था, उसकी उम्र 17 वर्ष 6 माह थी, जो कानूनन विवाह योग्य आयु से कम है. परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए इसके कानूनी परिणामों और सामाजिक दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया. समझाइश के बाद परिजनों ने बालक की 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक विवाह टालने की सहमति दी.
तीसरा मामला दोराहा क्षेत्र के ग्राम दुपाडिय़ा भील का है, जहां बाल विवाह की सूचना पर टीम ने त्वरित कार्रवाई की. मौके पर पहुंचकर वधु के दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें मार्कशीट के आधार पर बालिका की उम्र 17 वर्ष 8 माह पाई गई. टीम ने परिजनों को समझाइश देते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया और बालिका की शिक्षा जारी रखने पर जोर दिया. समझाइश का असर हुआ और परिजनों ने विवाह को फिलहाल स्थगित कर दिया.
तीनों ही मामलों में जिला प्रशासन की तत्परता, सतर्कता और प्रभावी संवाद के चलते बिना किसी विवाद के बाल विवाह रुकवाए गए. यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि समय रहते सूचना और समन्वित प्रयास हो, तो जन सहयोग से सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
वर की आयु कम तो वधु भी दो दिन पहले हुई व्यस्क
सोमवार को समीपस्थ ग्राम धनखेड़ी में बाल विवाह होने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची टीम ने देखा घर में शादी की सभी तैयारियां हो गई थीं. मंगलवार को बारात दोराहा क्षेत्र के एक ग्राम में जाने वाली थी. टीम द्वारा जब वर की आयु की जांच की गई तो वह 17 वर्ष छह माह आयु का निकला. इस दौरान उसकी वधु की आयु की जांच की गई तो वह दो दिन पहले ही व्यस्क हुई है. टीम के दबिश देने से वहां मायूसी छा गई थी. बुझे मन से उन्होंने विवाह आयोजन को टालना स्वीकारा.
