वैश्विक व्यापार का नया द्वार बनता मध्यप्रदेश

इंदौर में आयोजित इंडिया-लैटिन अमेरिका एंड कैरेबियन (एलएसी) ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फोरम केवल एक व्यापारिक सम्मेलन नहीं था, बल्कि यह मध्यप्रदेश की बदलती आर्थिक पहचान और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण संकेत भी है. जिस प्रदेश को कभी मुख्यत: कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता था, वह आज अंतरराष्ट्रीय निवेश, निर्यात और औद्योगिक साझेदारी का एक उभरता हुआ केंद्र बनकर सामने आ रहा है.

मध्यप्रदेश से लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन देशों को होने वाला निर्यात 19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,835 करोड़ रुपए तक पहुंच जाना इस परिवर्तन का प्रत्यक्ष प्रमाण है. यह आंकड़ा केवल व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश की उत्पादन क्षमता, औद्योगिक विस्तार और वैश्विक बाजारों में बढ़ती स्वीकार्यता का संकेतक भी है. ऐसे समय में जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं नए व्यापारिक साझेदारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की तलाश में हैं, मध्यप्रदेश के लिए यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है.

भारत और एलएसी देशों के बीच वर्तमान में लगभग 50 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है. इसे अगले पांच वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं. वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों ने भारत और लैटिन अमेरिकी देशों को एक-दूसरे के और करीब आने का अवसर दिया है. दोनों क्षेत्रों के पास विशाल उपभोक्ता बाजार, प्राकृतिक संसाधन, युवा आबादी और विकास की अपार संभावनाएं हैं. ऐसे में व्यापार और निवेश का विस्तार दोनों पक्षों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है.

मध्यप्रदेश की विशेषता यह है कि उसके पास विविध क्षेत्रों में निवेश और निर्यात की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं. फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्लास्टिक, आईटी, स्टार्टअप और कृषि आधारित उद्योगों में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है. इंदौर, पीथमपुर, भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर जैसे औद्योगिक केंद्र अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार नेटवर्क का हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

फोरम में आयोजित बिजनेस-टू-बिजनेस और वन-टू-वन बैठकों का महत्व भी कम नहीं है. अक्सर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सबसे बड़ी बाधा संवाद और संपर्क की कमी होती है. जब उद्यमियों को सीधे बातचीत और साझेदारी के अवसर मिलते हैं, तो निवेश और व्यापारिक समझौतों की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं. इंदौर में ऐसा मंच उपलब्ध कराना प्रदेश की आर्थिक कूटनीति की परिपक्वता को दर्शाता है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह कथन भी उल्लेखनीय है कि भारत और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच भौगोलिक दूरी भले अधिक हो, लेकिन सांस्कृतिक मूल्य और जीवन दर्शन में अनेक समानताएं हैं. आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में केवल उत्पाद और पूंजी ही नहीं, बल्कि विश्वास और सांस्कृतिक निकटता भी व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

मध्यप्रदेश यदि इसी प्रकार आधारभूत ढांचे, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और निवेश-अनुकूल नीतियों पर निरंतर ध्यान देता है, तो वह केवल भारत का नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक प्रवेश द्वार बन सकता है. इंदौर का यह फोरम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्रदेश को ‘विकसित मध्यप्रदेश 2047’ के लक्ष्य की ओर और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है.

 

 

Next Post

ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों की मेजबानी को तैयार इंदौर, व्यवस्थाएं पूरी

Mon Jun 8 , 2026
इंदौर:इंदौर में 9 से 13 जून तक होने वाले ब्रिक्स कृषि सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है. शनिवार को आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने सुरक्षा, आवास, यातायात, स्वच्छता, चिकित्सा और अतिथि सत्कार सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए. […]

You May Like