डबल गिरवी का खेल, ईओडब्ल्यू का एक्शन: फर्जी कागजों से लोन लेने वाला गिरोह बेनकाब

इंदौर। फर्जी दस्तावेजों और गलत वैल्यूएशन के जरिए 33 लाख रुपए का बैंक लोन लेने का बड़ा घोटाला सामने आया है. एक ही संपत्ति को दो अलग-अलग बैंकों में गिरवी रखकर किए गए इस फर्जीवाड़े का खुलासा एनपीए घोषित होने के बाद हुआ. मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सख्त कार्रवाई करते हुए बैंक अधिकारियों सहित सात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरोह का पर्दाफाश किया है.

फर्जी संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 33 लाख रुपए का लोन हासिल करने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने बड़ा खुलासा करते हुए बैंक अधिकारियों सहित सात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है. जांच में सामने आया कि पहले से ही दूसरे बैंक में गिरवी रखी संपत्ति को दोबारा कूटरचित दस्तावेजों के जरिए बंधक बनाकर यह धोखाधड़ी की गई. ईओडब्ल्यू को केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर आनंद टोटड द्वारा शिकायत दी गई थी, जिसमें बताया गया कि मेसर्स अबु रोड लाइन्स के संचालक करामत खान और अन्य ने वर्ष 2017 में सिंडीकेट बैंक (वर्तमान केनरा बैंक) नंदा नगर शाखा से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 33 लाख रुपए का ऋण लिया था. ईओडब्ल्यू जांच में बैंक अधिकारियों द्वारा के व्हाय सी और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं. पैनल एडवोकेट और मूल्यांकनकर्ता द्वारा भी गलत रिपोर्ट देकर लोन स्वीकृति में अहम भूमिका निभाई गई. प्रकरण में करामत खान (प्रोपराइटर मेसर्स अबु रोड लाइन्स), मोहम्मद रफीक, तत्कालीन ब्रांच मैनेजर जतिन गुप्ता, क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी, मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर सुनील जैन सहित जावेद खान और मोहम्मद इरफान खान के खिलाफ केस दर्ज किया है. ईओडब्ल्यू ने आरोपियों पर भादवि की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है. मामले में जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.

ऐसे रचा गया पूरा फर्जीवाड़ा…

जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2016 में बैंक में खाता खोलकर पहले 10 लाख रुपए का लोन लिया था. बाद में ऋण सीमा बढ़ाने के लिए ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित मकान नंबर 435-ए के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए. पैनल एडवोकेट और मूल्यांकनकर्ता की भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर 21 नवंबर 2017 को 33 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कर दिया.

पहले से गिरवी थी संपत्ति, फिर भी मिल गया लोन…

जब लोन की अदायगी नहीं हुई तो 30 दिसंबर 2019 को खाते को एनपीए घोषित कर दिया. सरफेसी कार्रवाई के दौरान खुलासा हुआ कि संबंधित संपत्ति पहले से ही इंडियन बैंक में गिरवी थी और वर्ष 2021 में उसकी नीलामी भी हो चुकी थी.

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