उपलब्धियों के बारह वर्ष, चुनौतियों का नया दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को मंगलवार को 12 वर्ष पूर्ण हो गए हैं . 2014 में शुरू हुई यह यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं रही, बल्कि भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और प्रशासनिक संस्कृति में व्यापक बदलावों का दौर भी रही है. तीन लगातार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर नरेंद्र मोदी ने भारतीय लोकतंत्र में एक ऐसा राजनीतिक अध्याय लिखा है, जिसकी तुलना अब स्वतंत्र भारत के शुरुआती दशकों के लंबे नेतृत्व काल से की जा रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने जनता का भरोसा बरकरार रखा है. इन 12 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि सरकार ने विकास और कल्याण योजनाओं को सीधे आम नागरिक तक पहुंचाने का प्रयास किया. प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और जनधन खातों जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है. डिजिटल भुगतान व्यवस्था में यूपीआई की सफलता ने भारत को दुनिया के अग्रणी डिजिटल देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है. आज भारत में होने वाले डिजिटल लेनदेन का स्तर कई विकसित देशों से भी आगे माना जाता है.राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला, राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विस्तार तथा आतंकवाद और नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिने जाते हैं. हाल के वर्षों में रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ जैसी सैन्य सफलताओं ने भी भारत की सामरिक क्षमता को नई पहचान दी है.आर्थिक क्षेत्र में भारत का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है. राजमार्ग निर्माण की गति में वृद्धि, रेलवे और हवाई अड्डों का विस्तार तथा रिकॉर्ड स्तर पर बुनियादी ढांचा निवेश ने विकास को नई दिशा दी है. विश्व बैंक, आईएमएफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत को वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन मान रही हैं. फिर भी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी चुनौतियां समाप्त हो गई हैं. मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की है. देश की युवा आबादी तेजी से बढ़ रही है और गुणवत्तापूर्ण रोजगार की मांग भी उसी अनुपात में बढ़ रही है. आर्थिक विकास दर को रोजगार सृजन से जोडऩा अब सरकार की प्राथमिक आवश्यकता है. जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियां भी आने वाले वर्षों में गंभीर मुद्दे बनने वाली हैं. अनेक राज्यों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि तथा शहरी जीवन दोनों पर दिखाई देने लगा है. इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाना, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटना और निर्यात क्षमता का विस्तार करना भी आवश्यक होगा.राजनीतिक दृष्टि से भी सरकार के सामने अपेक्षाओं का दबाव पहले से कहीं अधिक है. लगातार तीन कार्यकालों की सफलता ने जनता की उम्मीदों को बढ़ाया है. अब केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनके परिणामों का मूल्यांकन भी होगा.

12 वर्षों के इस पड़ाव पर कहा जा सकता है कि मोदी सरकार ने भारत की दिशा और गति दोनों को प्रभावित किया है. लेकिन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अगले दशक में रोजगार, जल सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि जैसे क्षेत्रों में निर्णायक प्रगति करनी होगी. उपलब्धियों का यह दशक महत्वपूर्ण रहा है, परंतु आने वाला समय इस बात का परीक्षण करेगा कि भारत अपनी नई आकांक्षाओं को किस हद तक वास्तविकता में बदल पाता है.

 

 

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