मप्र में ग्रामीण विकास ठप? बजट का 41% ही हुआ खर्च, मनरेगा और कौशल विकास की स्थिति चिंताजनक: पटवारी

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को राज्य की भाजपा सरकार पर कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खराब योजना और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण प्रदेश में ग्रामीण विकास की योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं।

मीडिया से बातचीत में पटवारी ने कहा कि सरकार जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के बजाय केवल प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आवंटित धनराशि का भी पूरा उपयोग नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ग्रामीण विकास के लिए कुल 27,745.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन 7 मार्च 2026 तक केवल 11,457.66 करोड़ रुपये, यानी लगभग 41.3 प्रतिशत राशि ही खर्च की गई है।

पटवारी ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना में 3.44 प्रतिशत, निर्मल भारत अभियान में 6.01 प्रतिशत और मनरेगा में 18.16 प्रतिशत खर्च का हवाला देते हुए इसे चिंताजनक बताया।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े प्रशासनिक लापरवाही और ग्रामीण कल्याण के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, प्रमुख योजनाओं में कम खर्च होने से गांवों में रोजगार, आवास और आधारभूत ढांचे के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

 

 

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