
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में शासकीय अस्पतालों में कार्यरत सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर्स को उनके द्वारा प्राप्त अंतिम वेतन से 8 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ प्रदान करने कहा है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने डॉक्टर्स को 6 फीसदी ब्याज के साथ 2018 से एरियर्स का भुगतान करने के भी निर्देश दिए। इसके अलावा शासन को ऑपरेशन व हस्तक्षेप उपचार से प्राप्त राजस्व का 20 फीसदी राशि का भी भुगतान करने भी कहा। एकलपीठ ने मामले में स्पष्ट किया कि चूंकि उपरोक्त भुगतान करने के लिए एक नियम है, इसलिए सरकार नियमों के विपरीत कार्य नहीं कर सकती। न्यायालय ने कहा कि उक्त भुगतान सुपरस्पेशलिटी डॉक्टरों को दिया जाए।
सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर्स एसोसिएशन रीवा की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार प्रारंभिक निर्धारित वेतन से वेतन वृद्धि की गणना कर रहे हैं। डॉक्टर्स को हर साल मिलने वाली वेतन वृद्धि को अगले वर्ष की वेतन वृद्धि की गणना में नहीं जोड़ा जाता है। मांग की गई कि अंतिम वेतन से वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करें। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने कहा कि 2018 की अधिसूचना के नियम के अनुसार प्रत्येक वर्ष आठ प्रतिशत की वेतनवृद्धि दी जानी है। यदि निर्धारित प्रारंभिक वेतन से वेतनवृद्धि दी जाती है, तो वास्तव में एक वर्ष के बाद कोई वेतनवृद्धि नहीं होगी। पूरी सेवा अवधि में, सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर को प्रारंभिक वेतन से केवल आठ फीसदी की वेतनवृद्धि ही मिलेगी। न्यायालय ने आयुक्त के उस आदेश को अनुचित करार देते हुए निरस्त कर दिया, जिसमें सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर को प्रारंभिक वेतन से केवल 8 फीसदी की वेतनवृद्धि देने का प्रावधान किया गया था।
