
यरूशलेम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यरूशलम स्थित विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र ‘यद वाशेम’ का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने होलोकॉस्ट (नरसंहार) के पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और शांति तथा मानवीय गरिमा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दोहराया।प्रधानमंत्री मोदी की इस स्मारक की यह दूसरी यात्रा है।अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने उन 60 लाख यहूदियों की याद में पुष्पचक्र अर्पित किया, जिन्होंने होलोकॉस्ट के दौरान अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने ‘हॉल ऑफ नेम्स’ सहित स्मारक परिसर के महत्वपूर्ण हिस्सों का भी भ्रमण किया। शामिल है। इसे ‘बुक ऑफ नेम्स हॉल’ के रूप में भी जाना जाता है, जहाँ लाखों पीड़ितों की पहचान और उनके साक्ष्यों को संरक्षित रखा गया है।इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि होलोकॉस्ट के पीड़ितों की स्मृति का सम्मान करना शांति और मानवीय गरिमा को बनाए रखने के हमारे साझा संकल्प को नवीनीकृत करता है।उल्लेखनीय है कि वर्ष 1953 में स्थापित ‘यद वाशेम’ द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी उत्पीड़न के पीड़ितों के लिए इजरायल का आधिकारिक स्मारक है। यह केंद्र होलोकॉस्ट संबंधी शोधों का भी काम करता है। प्रधानमंत्री ने जिस ‘हॉल ऑफ नेम्स’ का दौरा किया, वहां पीड़ितों के रिश्तेदारों और दोस्तों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य मौजूद हैं, ताकि उनकी यादें भावी पीढ़ियों के लिए बनी रहें।प्रधानमंत्री ने स्मारक की आगंतुक पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए और ऐतिहासिक स्मृतियों को संजोने के महत्व पर जोर दिया ताकि ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति कभी न हो। उनके इस कदम को नफरत, भेदभाव और हिंसा के खिलाफ लड़ने तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की भारत की पुरानी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा हाल के वर्षों में भारत और इजरायल के बीच गहरे होते संबंधों को भी बताती है। भारत ने 1992 में इजरायल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और तब से रक्षा, कृषि, नवाचार और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार हुआ है।
