हड़ताल पर मिलर्स : भुगतान के लिए भटक रहे किसान 

सीधी। मिलर्स की हड़ताल के चलते गोदामों में उपार्जित धान के न पहुंचने से सैकड़ों किसान भुगतान के लिए भटक रहे हैं । धान की मिलिंग बाधित हो जाने से अब नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा 3 लाख क्विंटल धान उत्तर प्रदेश भेजने की तैयारी की जा रही है। जिससे समय पर मिलिंग का काम हो सके। दरअसल सीधी जिले में धान की मिलिंग के लिए 19 मिलर्स पंजीकृत हैं। इनमें 3 को छोंडक़र शेष मिलर्स द्वारा विभाग के साथ अनुबंध नहीं किया जा रहा है। मिलर्स द्वारा अपनी कुछ मांगों को लेकर हड़ताल किया जा रहा है। जिसके चलते धान की मिलिंग का काम काफी बाधित है। समय पर उपार्जित धान की मिलिंग का कार्य न होने पर बड़ी मात्रा में खरीदी गई धान को सुरक्षित करने का संकट भी आने वाले समय में निर्मित हो जाएगा। इसी वजह से विभागीय अधिकारी भी काफी सांसत में हैं। गोदामों में जगह न होने से न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद ओपन कैंप में धानों को रखने की मजबूरी बनी हुई है। बताया गया है कि जिले में एफसीआई का एक भी गोदाम नहीं है। ऐसे में तैयार चावल रीवा, सतना, मैहर, शहडोल, अनूपपुर भेजना पड़ता है। उक्त जिलों में भी एफसीआई के गोदाम में जगह न होने से चावल नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में मिलर्स भी काफी परेशान हैं। बताया गया है कि इस वर्ष सीधी जिले में करीब 1 लाख क्विंटल धान को ओपन कैंप में रखा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सर्रा ओपन कैंप में 54 हजार क्विंटल, मझौली ओपन कैंप में 22 हजार क्विंटल, सेवा सहकारी समिति चौफाल अंतर्गत केंद्र क्रमांक 2 सैरपुर पटेहरा में 14 हजार 577 क्विंटल एवं सेवा सहकारी समिति केवीएस गोदाम पटपरा में 6670 क्विंटल धान ओपन कैंप में रखी गई है। गोदामों में जगह न होने से ओपन कैंप में धान भंडारित करना विभाग की मजबूरी हो गई थी। मिलिंग शुरू होते ही सबसे पहले ओपन कैंप में रखी धान की मिलिंग कराई जाती है। गोदामों में धान न पहुंचने से किसानों का भुगतान भी फंसा हुआ है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में 26 हजार 724 किसानों से धान उपार्जन कराया। जिसमें से केवल 23 हजार 463 किसानों को ही भुगतान मिला। शेष किसानों के लिए समस्या निर्मित हो गई है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि जो धान गोदामों में नहीं पहुंची है उसी के चलते भुगतान अटका है। अपडेशन के बाद भुगतान किया जाएगा। जिले सहित प्रदेश के अन्य जिलों के मिलरों की हड़ताल के कारण अब उपार्जित धान अन्य राज्यों में भेजने की तैयारी चल रही है। सीधी जिले से 3 लाख क्विंटल धान उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिलिंग के लिए भेजने की तैयारी है। इसके लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है। विभागीय अधिकारी भी इसी प्रयास में हैं कि जल्द से जल्द ओपन कैंप में रखी गई धान की मिलिंग का काम हो सके। जिससे चावल आपूर्ति की व्यवस्था भी बनी रहे।

39.८८ करोड़ रुपए का भुगतान अटका

विभाग के अनुसार किसानों को उपार्जित धान में से 373.84 करोड़ का भुगतान करना था। अब तक 333.96 करोड़ रुपए भुगतान के लिए जारी किए गए हैं। इस तरह 39.88 करोड़ रुपए अभी किसानों को भुगतान होना है। विभाग की ओर से ईपीओ जारी हो चुकी है। फिर भी भुगतान अटका हुआ है। जिले में 15.78 लाख क्विंटल से अधिक की धान की खरीदी हुई है। जिसमें से 100 प्रतिशत रेडी टू ट्रांस्पोर्ट और 94 प्रतिशत से अधिक परिवहन भी हो चुका है। सवाल यह है कि जब धान गोदामों में पहुंच चुकी है तो किसानों को भुगतान देने में देरी क्यों हो रही है। वहीं विभागीय आंकड़े के अनुसार करीब 23 हजार क्विंटल धान रिजेक्ट किया गया है। जिसके कारण कई किसानों का भुगतान भी फंस गया है। अगर धान रिजेक्ट था तो उसको खरीदने पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि खरीदी की गई तो भुगतान न देना भी बड़ी मनमानी मानी जा रही है। बताया गया है कि सीधी जिले में उपार्जन के दौरान धान मिलर्स की मनमानी हर वर्ष सामने आती है। उनके द्वारा कई तरह की मांगें रखी जाती हैं। जिस वजह से उपार्जन के दौरान धान की मिलिंग का कार्य प्रभावित होता है। ऐसे में शासन स्तर से यह व्यवस्था बनानी चाहिए कि अन्य प्रदेशों में भी मिलिंग के लिए धान पहुंच सके।

इनका कहना है

जिले के 19 पंजीकृत मिलर्स में 3 मिलर द्वारा ही मिलिंग के लिए अनुबंध किया गया है। शेष मिलर मांगों को लेकर हड़ताल के समर्थन में हैं। ऐसे में मिलिंग का कार्य काफी प्रभावित है। जिले से 3 लाख क्विंटल धान उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिलिंग के लिए भेजने की तैयारी है। अनुबंध की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

एम.एल. बडेरा, प्रबंधक

नागरिक आपूर्ति निगम सीधी

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