
भोपाल। इंदौर प्रवास के दौरान राज्यपाल को ठहराए गए रेसीडेंसी कोठी में सामने आई अव्यवस्थाओं ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या राज्यपाल को परोसे जाने वाले भोजन में कीड़े थे और क्या आवासीय व्यवस्था में गंभीर गंदगी पाई गई थी? हालांकि प्रशासन भोजन में कीड़े मिलने के आरोपों को खारिज कर रहा है, लेकिन निरीक्षण में मिली गंदगी और लापरवाही ने इंदौर के जिला प्रशासन पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर भोजन में कीड़े मिलने और रसोई में कॉकरोच पाए जाने की चर्चाओं के बीच गंदगी और लापरवाही ने पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यपाल मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने इंदौर पहुंचे थे। प्रवास से पूर्व एडीसी और अधिकारियों द्वारा रेसीडेंसी कोठी का निरीक्षण किया गया, जिसमें रसोईघर की स्वच्छता संतोषजनक नहीं पाई गई। डस्टबिन खुले मिले, बर्तन गंदे थे और खाद्य सामग्री के भंडारण में अनियमितताएं सामने आईं। बेडशीट पर दाग-धब्बों की शिकायत भी की गई, जिसे बदलने में कर्मचारियों ने तत्परता नहीं दिखाई।
बताया जाता है कि इन परिस्थितियों से अवगत होने के बाद राज्यपाल ने कोठी में भोजन करने से इनकार कर दिया। हालांकि अपर कलेक्टर रोशन राय ने भोजन में कीड़े मिलने की बात को भ्रामक बताया है और कहा है कि ऐसा कोई तथ्यात्मक प्रमाण नहीं मिला।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने माना कि सेवा और स्वच्छता में कमी थी। संबंधित सेवा प्रदाता फर्म रतन एम्पोरियम को कारण बताओ नोटिस जारी कर सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है तथा भुगतान में कटौती के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कई अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रवास से पहले निरीक्षण हुआ था तो कमियां समय रहते दूर क्यों नहीं की गईं? क्या वीआईपी प्रोटोकॉल केवल औपचारिकता बनकर रह गया है? प्रशासनिक तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी उंगलियां उठ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सेवा प्रदाता पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
