नयी दिल्ली, 20 फरवरी (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में सहायता के लिए वर्तमान और पूर्व न्यायिक अधिकारियों को तैनात करे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए राज्य में कथित हिंसा की घटनाओं पर स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है। अदालत ने इस दौरान राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच जारी खींचतान पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे आरोपों और प्रत्यारोपों का एक दुर्भाग्यपूर्ण खेल करार दिया, जो दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
अदालत ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि न्यायिक अधिकारियों को इस कार्य में लगाने से सामान्य अदालती मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है क्योंकि न्यायाधीशों को समय लगेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक न्यायाधीशों की समिति, रजिस्ट्रार जनरल और प्रमुख जिला न्यायाधीशों के साथ मिलकर यह निर्णय लेने का निर्देश दिया है कि क्या अंतरिम राहत वाले मामलों को एक सप्ताह या दस दिनों के लिए वैकल्पिक अदालतों में स्थानांतरित किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग ने अदालत को सूचित किया कि वह 28 फरवरी के बाद अंतिम सूची प्रकाशित कर सकता है लेकिन एसआईआर की प्रक्रिया इसके बाद भी जारी रह सकती है। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो 28 फरवरी के बाद सूची प्रकाशित की जा सकती है, लेकिन ऐसी सूची को पूरी तरह अंतिम नहीं माना जाएगा। इसके स्थान पर बाद में एक पूरक सूची प्रकाशित की जाएगी ताकि संशोधन प्रक्रिया के दौरान आए सभी परिवर्तनों को शामिल किया जा सके।

