गुजरात एटीएस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवादियों की कोई औकात नहीं. अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट से जुड़े चार कट्टरपंथी आतंकी गिरफ्तार हुए हैं, जिनकी साजिश थी भारत की लोकतांत्रिक नींव को उखाड़ फेंकना और “शरिया कानून” थोपना. यह सिर्फ एक आतंकी मॉड्यूल नहीं था, बल्कि भारत के खिलाफ चल रही गजवा-ए-हिंद की साजिश का हिस्सा था.
दिल्ली, नोएडा और गुजरात में फैला यह नेटवर्क दिखाता है कि दुश्मन अब हमारी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारे बीच छिपकर काम कर रहा है. उनके पास से बरामद भडक़ाऊ सामग्री, नकली भारतीय करेंसी, अल-कायदा से जुड़ा कंटेंट और मैप इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान के इशारे पर यह गंदा खेल खेला जा रहा था. यही नहीं, इन आतंकियों ने सोशल मीडिया के जरिए भारत के युवाओं को गुमराह करने का षड्यंत्र रचा. यह मानसिक जहरीला जाल अब हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
इस सफलता का श्रेय गुजरात एटीएस की सतर्कता और साहस को जाता है. उन्होंने न केवल एक बड़े हमले को रोका, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत में गजवा-ए-हिंद का ख्वाब देखने वालों को सिर्फ जेल या कब्र मिलेगी. देश को गर्व है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां हर मोर्चे पर दुश्मनों के मंसूबे नाकाम कर रही हैं.इसी क्रम में, इंदौर में भी प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया गया है. उसका नाम आकाशदीप सिंह उर्फ ‘बाज़’ है. उसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में एक निर्माण स्थल से गिरफ्तार किया, जहां वह क्रेन ऑपरेटर के रूप में अपनी पहचान छिपाकर काम कर रहा था. आकाशदीप सिंह पंजाब के बटाला के क्विला लाल सिंह थाने पर अप्रैल 2025 में हुए ग्रेनेड हमले में शामिल था. यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि आतंकी नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं और उन्हें लगातार निष्क्रिय करना हमारी सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है. अब वक्त आ गया है कि ऐसे आतंकी नेटवर्क की जड़ों को पूरी तरह खत्म किया जाए. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को लेकर और कड़े कदम उठाने होंगे. जो लोग भारत में रहकर हमारे संविधान, हमारे लोकतंत्र और हमारी संस्कृति को चुनौती देने की हिम्मत करते हैं, उनके खिलाफ बगैर किसी नरमी के कठोरतम दंड होना चाहिए. साथ ही, सोशल मीडिया पर चल रहे कट्टरपंथी एजेंडे को कुचलने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बने.
भारत एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम अपनी सहिष्णुता को हमारी कमजोरी बना दें. जो ताकतें हमारे खिलाफ साजिश करेंगी, उन्हें यह जान लेना चाहिए—भारत की धरती पर जिहाद नहीं चलेगा. यहां केवल संविधान चलेगा, और जो संविधान को चुनौती देगा, वह खत्म कर दिया जाएगा. इस संबंध में केंद्र सरकार की भी प्रशंसा करनी होगी कि उसने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है.
पिछले 11 वर्षों के दौरान यदि कश्मीर के दो-तीन जिलों को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी आतंकवाद की घटनाएं नहीं हुई हैं. कुल मिलाकर सुरक्षा एजेंसियों को निरंतर चौकस रहने की जरूरत है.
