पैक्स सिलिका समझौता कर, हम अपनी मजबूरी का फायदा उठाने वालों को ना कह रहे हैं: जैकब हेलबर्ग

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (वार्ता) अमेरिका और भारत के बीच तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से ‘पैक्स सिलिका’ घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी आर्थिक मामलों के उपमंत्री जैकब हेलबर्ग की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर अमेरिकी आर्थिक मामलों के उपमंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि यह समझौता केवल कागज पर एक करार नहीं है, बल्कि एक साझा भविष्य का रास्ता है।

श्री हेलबर्ग ने यहां हस्ताक्षर समारोह के दौरान ने कहा, “हम साथ मिलकर यह कहते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है। संप्रभुता किसी वैश्विक दफ्तर या नौकरशाही से नहीं आती। यह उन निर्माताओं से आती है, जो आज इस कमरे में मौजूद हैं।” उन्होंने कहा कि यह घोषणा एआई के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बढ़ावा देने वाला है। साथ ही, यह तकनीकी विकास को रोकने की कोशिशों के खिलाफ खड़े होने का एक संकल्प है।

अमेरिकी उपमंत्री ने प्राचीन इतिहास के एक सबक का जिक्र करते हुए कहा कि सिकंदर महान ने एक बार कहा था कि एशिया के लोग इसलिए गुलाम थे क्योंकि उन्होंने ‘ना’ शब्द बोलना नहीं सीखा था। उन्होंने कहा, “हमारे दोनों राष्ट्रों की नींव ‘ना’ शब्द पर टिकी है… इसलिए आज जब हम पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, तो हम अपनी मजबूरी और निर्भरता का फायदा उठाने वालों को ‘ना’ कहते हैं, और हम ब्लैकमेल को ‘ना’ कहते हैं।”

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को एक ‘रणनीतिक गठबंधन’ बताया जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को आकार देगा। उन्होंने कहा कि यह खनिजों और चिप बनाने से लेकर एआई के इस्तेमाल तक, पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित करेगा। उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका का लक्ष्य मजबूरी वाली निर्भरता को खत्म करके भरोसेमंद औद्योगिक साझेदारी बनाना है, जो स्वतंत्र बाजारों को ताकत दे सके।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह समझौता वैश्विक तकनीक और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे देश के प्रति विश्वास पैदा किया है। आज पैक्स सिलिका पर हस्ताक्षर किए गए, जो सेमीकंडक्टर आपूर्ती श्रृंखला, इसके निर्माण और चिप डिजाइन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि हमारे देश में सेमीकंडक्टर का पूरा माहौल अच्छी तरह स्थापित हो सके।”

यह घोषणा आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा, तकनीकी संप्रभुता और एआई की वैश्विक दौड़ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका-भारत के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

श्री गोर ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझौता केवल व्यापार और आयात शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो महान लोकतंत्रों द्वारा एक-दूसरे से केवल सामान खरीदने के बजाय मिलकर निर्माण करने की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।

तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी को साझा समृद्धि, तकनीकी नेतृत्व और लोकतांत्रिक सहयोग में एक लंबे समय के निवेश के रूप में देखा जा रहा है।

श्री वैष्णव ने कहा, “हम यहाँ केवल एक शिखर सम्मेलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि भविष्य बना रहे हैं। हम अपनी युवा पीढ़ी के लिए नींव रख रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 28 वर्ष की औसत उम्र के साथ भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 में भी भारत की औसत उम्र 37 वर्ष होगी, जो आने वाले दशकों तक तकनीक और नवाचार के दम पर विकास और अवसरों को सुनिश्चित करेगी।

 

 

 

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