छतरपुर। मरीजों की जान बचाने वाली एम्बुलेंस खुद ही बदहाल स्थिति में सड़कों पर दौड़ रही है। जिला अस्पताल मरीज लेकर पहुंची एम्बुलेंस (CG 04 NS 4580) की हालत देखकर परिजन सहम गए। वाहन की बॉडी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, जबकि सामने लगा फ्रंट ग्लास पिछले दो साल से टूटा हुआ है। ऐसी स्थिति में एम्बुलेंस का संचालन न सिर्फ चालक और स्टाफ के लिए बल्कि मरीजों के लिए भी बड़ा जोखिम बन गया है।
परिजनों का कहना है कि हल्की टक्कर या तेज हवा में टूटा कांच चटककर आगे बैठे चालक या सहयोगी के चेहरे पर गिर सकता है, जिससे गंभीर हादसा हो सकता है। कई लोगों ने बताया कि एम्बुलेंस में बैठते समय डर बना रहता है, लेकिन आपात स्थिति में उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।
मामले में एम्बुलेंस के ईएमटी मंगल अहिरवार ने भी वाहन की खराब स्थिति स्वीकार की। उन्होंने बताया कि यह संस्था की गाड़ी है और इसकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। एम्बुलेंस करीब 5 लाख 50 हजार किलोमीटर चल चुकी है और पिछले दो वर्षों से टूटा कांच बदलवाया नहीं गया। कई बार संबंधित जिम्मेदारों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना प्राथमिक जिम्मेदारी है, तो जर्जर एम्बुलेंसों को सड़कों पर क्यों उतारा जा रहा है।
