निगमायुक्त को हटाने के लिए महापौर ने खोला मोर्चा

सतना: आयुक्त नगर निगम और महापौर के बीच अनबन के सामचाचार तो पिछले कई दिनों से सामने आ रहे थे, लेकिन बुधवार को यह तब सार्वजनिक भी हो गया जब पार्षदों का नेतृत्व करते हुए महापौर ने जिला कलेक्टर से भेंट की और निगमायुक्त को ननि सतना से हटाए जाने की मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा.महापौर योगेश ताम्रकार ने बुधवार को जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस से मुलाकात की. इस दौरान उनके साथ ननि परिषद अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी सहित 8 पार्षद भी उपस्थित थे. कलेक्टर से भेंट करने के बाद महापौर और पाषदों ने मिलकर उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा. सौंपे गए ज्ञापन में आयुक्त ननि शेर सिंह मीणा को सतना से हटाने की मांग की गई है.

शहर के 27 पार्षदों के हस्ताक्षर के साथ सौंपे गए इस ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया है कि वार्डों के विकास कार्य से संबंधित फाइलें पिछले 6-6 महीने से निगमायुक्त कार्यालय में लंबित हैं. निगमायुक्त द्वारा निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का फोन भी लगातार नहीं उठाया जाता है. पार्षदों द्वारा निगमायुक्त से कई बार मुलाकात कर उन्हें इस बात की जानकारी दी जा चुकी है कि सीवर लाइन और पाइप लाइन सहित अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. शहर के पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण नगरवासी भी त्राहि-त्राहि कर रहे हैं. जिसे देखते हुए अनुरोध किया गया कि आयुक्त ननि शेर सिंह मीणा को तत्काल प्रभाव से नगर निगम सतना से पृथक किया जाए.
 कार्रवाई नहीं करने से बिगड़ी बात
वार्ड पार्षदों द्वारा विकास कार्यों में बरती जा रही लापरवाही को लेकर महापौर के समक्ष कई बार शिकायत की गई थी. जिसे संज्ञान में लेते हुए महापौर द्वारा कुछ कार्यों की जांच के साथ-साथ जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी. लेकिन इसके बावजूद भी निगमायुक्त द्वारा न तो कार्यों की जांच कराई गई और न ही जिम्मेदारों के विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई की. जिसे देखते हुए महापौर पिछले दिनों आयोजित मेयर-इन-कौंसिल की बैठक को छोडक़र बाहर चले गए थे. महापौर का कहना था कि यदि आरोप सामने आ रहे हैं तो उनकी जांच और कार्रवाई भी होना आवश्यक है. लिहाजा निगम प्रशासन यदि इसे गंभीरता से नहीं ले रहा तो एमआईसी द्वारा केवल प्रस्तावों को पास करने का कोई मतलब नहीं बनता.
 मुख्यमंत्री से होगी शिकायत
प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्षदों के साथ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के बाद बुधवार की रात को ही महापौर भोपाल के लिए रवाना हो गए. बताया गया कि भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर उनसे निगमायुक्त की कार्यशैली की शिकायत की जाएगी. इसी कड़ी में निगमायुक्त को सतना से हटाए जाने की मांग भी की जाएगी. गौरतलब है कि नगर निगम के पिछले कार्यकाल में भी तत्कालीन महापौर ममता पाण्डेय और तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल के बीच भी तनातनी की घटनाएं सामने आईं थीं. लेकिन उस दौरान मामले ने इतना तूल नहीं पकड़ा था कि बात मुख्यमंत्री तक पहुंच जाए.

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