जम्मू, 26 नवम्बर (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संविधान दिवस के अवसर बुुुुधवार को कहा कि पिछले 76 वर्षों से भारतीय संविधान समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय का प्रतीक रहा है तथा देश के नागरिकों के लिए मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ की तरह कार्य करता आया है।
श्री सिन्हा आज यहां संविधान दिवस समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराया और संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने नीति-निर्माताओं और अधिकारियों से संविधान के मूल्यों को बनाए रखने तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखना सभी की जिम्मेदारी है तथा समाज में आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
श्री सिन्हा ने कहा कि 2019 में 67 वर्षों के बाद संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर पूर्ण रूप से लागू हुए, जिससे भेदभाव और अन्याय के दौर का अंत हुआ। अब जम्मू-कश्मीर संविधान में निहित समानता, सामाजिक और आर्थिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उनकी प्राथमिकता शुरू से ही नागरिकों के जीवन में सुधार लाना, भेदभाव और अन्याय को समाप्त करना, आतंक के तंत्र को खत्म करना और केंद्र की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना रहा है। उन्होंने कहा, “जो पूछते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में हमने क्या हासिल किया, मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि देशभक्तों को प्रताड़ित करना और अलगाववादियों को पुरस्कृत करना पूरी तरह बंद कर दिया गया है। संविधान के सभी प्रावधान लागू करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के हर भाई-बहन को सम्मान और गरिमा प्रदान की है।”
यह कार्यक्रम संविधान के अंगीकरण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर संस्कृति विभाग द्वारा विधि, न्याय और संसदीय कार्य विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।
