
गुना। जिला अस्पताल के नवनिर्मित क्रिटिकल केयर ब्लॉक में अव्यवस्थाओं का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिस नई बिल्डिंग को महज 10 दिन के ट्रायल रन के लिए शुरू किया गया था, वह तीन दिन के भीतर ही अचानक बंद कर दी गई। बिल्डिंग पर ताला लटक जाने के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं, जिससे डॉक्टरों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, नए सेंटर की शुरुआत के दौरान पुराने अस्पताल से डॉक्टरों का जरूरी मेडिकल सामान, मशीनें और अन्य उपकरण नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए गए थे। लेकिन रात के समय बिना किसी पूर्व सूचना के बिल्डिंग में ताला लगा दिया गया, जिससे डॉक्टरों के उपकरण और मशीनें अंदर ही कैद होकर रह गए। अब स्थिति यह है कि उपकरणों के अभाव में डॉक्टरों के लिए मरीजों का उपचार करना लगभग नामुमकिन हो गया है।
बदहाली की तस्वीर: मोबाइल टॉर्च से हो रही जांच
बिल्डिंग बंद होने का सबसे घातक असर ओपीडी सेवाओं पर पड़ा है। मशीनों के बिना डॉक्टर ‘आदिम’ तरीके से इलाज करने को मजबूर हैं। अस्पताल में संवेदनहीनता और लाचारी का नजारा तब देखने को मिला जब कान के डॉक्टर को एक मासूम बच्ची के कान की जांच करने के लिए मोबाइल की टॉर्च का सहारा लेना पड़ा। वहीं, आंखों के विशेषज्ञ बिना किसी आधुनिक मशीन के केवल अनुमान के आधार पर मरीजों का चेकअप कर रहे हैं।
अधिकारी मौन, मरीज बेहाल
दूर-दराज से आए मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि डॉक्टर संसाधन न होने के कारण हाथ पर हाथ धरे बैठने को मजबूर हैं। इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है कि ट्रायल रन पर चल रही बिल्डिंग को अचानक बंद क्यों किया गया। फिलहाल, डॉक्टर और मरीज दोनों ही इस ताले के खुलने के इंतजार में हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पुनः सुचारू हो सकें।
