पुलिस बनी रक्षक महिला को आत्महत्या करने से रोका

मंडलेश्वर। पुलिस सही अर्थों में जनता की रक्षक होती है जो आम तौर पर अपना काम करने में आना कानी करने के लिए बदनाम भी है लेकिन मंडलेश्वर पुलिस ने जनता के जान माल की सुरक्षा के लिए हमेशा अपनी जान जोखिम में डालने के भी कई उदाहरण प्रस्तुत किए है।शनिवार की दोपहर में एक महिला को संदिग्ध अवस्था में नर्मदा ब्रिज पर देखा गया जिसकी सूचना मंडलेश्वर टी आई दीपक यादव को कसरावद के अर्जुन भाऊ पाटील और आलोक पाटीदार द्वारा दी गई जिसके बाद टी आई ने अमित पाल को पुल पर भेजा तो वहां महिला रेलिंग के पास खड़ी मिली।अमित पाल ने उससे जानकारी ली तो उसने नाम पता नहीं बताया फिर पुलिस द्वारा समझाने पर वो अपने घर चली गई। नर्मदा का यह पुल आत्महत्या के लिए कुख्यात रहा है।इसलिए यहां पुलिस की सतर्कता हमेशा रहती ।पिछले साल नवंबर के महीने में एक व्यक्ति रेलिंग पर चलता हुआ जा रहा था जिसे अनुराग सिंह तोमर और अमित पाल द्वारा ही चतुराई से फुर्ती से खींचकर उतरा गया था उस समय थोड़ी सी चुक हो जाती तो वह व्यक्ति नर्मदा में गिरकर मर गया होता ।मंडलेश्वर पुलिस की सक्रियता ओर और बहादुरी को जनता की सराहना मिल रही है।

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