मुंबई, 11 फरवरी (वार्ता) देश में मिश्रित उर्वरकों की क्षमता तीन साल में 25 प्रतिशत बढ़कर करीब दो करोड़ टन प्रति वर्ष पर पहुंचने की उम्मीद है। बाजार अध्ययन एवं साख निर्धारक एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मिश्रित उर्वरकों के विनिर्माण क्षेत्र में वित्त वर्ष 2028-29 तक 40 लाख टन की सालाना की क्षमता वृद्धि का अनुमान है। वर्तमान में इस क्षेत्र की क्षमता 1.6 करोड़ टन है। इस प्रकार यह एक-चौथाई बढ़कर दो करोड़ टन सालाना पर पहुंच जायेगी। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि उर्वरकों की घरेलू खपत में एक-तिहाई हिस्सा मिश्रित उर्वरकों का है। मिश्रित उर्वरकों की मांग में एक-तिहाई की पूर्ति आयात के जरिये की जाती है जिसमें मुख्यतः डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) है। दूसरी तरफ, नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटैशियम (एनपीके) की ज्यादातर जरूरत की पूर्ति घरेलू उत्पादन से ही होती है।
क्रिसिल के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कुल मिश्रित उर्वरक में एनपीके का हिस्सा बढ़कर 60 प्रतिशत पर पहुंच गया। इससे पहले के पांच साल में इसकी औसत हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक आनंद कुलकर्णी ने कहा कि मजबूत मांग और सीमित क्षमता के कारण चालू वित्त वर्ष में निर्माताओं ने 95 प्रतिशत क्षमता का दोहन किया है। पिछले सात साल में मिश्रित उर्वरक की क्षमता में सिर्फ पांच लाख टन सालाना की वृद्धि हुई है। कंपनियों की योजना के अनुसार, क्षमता वृद्धि से आयात पर निर्भरता 30-32 प्रतिशत कम होगी। दूसरी तरफ, क्षमता विस्तार न होने से वित्त वर्ष 2028-29 तक आयात में 10-11 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में पोषक तत्त्व आधारित सब्सिडी समय पर जारी करने की भी सलाह दी गयी है। इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इस मद में 49,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि सिर्फ 22 प्रतिशत का आवंटन किया गया है।

