नई दिल्ली | पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। चिदंबरम ने इस सौदे की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकार जिसे ‘ऐतिहासिक जीत’ बता रही है, वह वास्तव में अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ एक असमान समझौता है। उन्होंने एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में कहा कि कोई भी आधिकारिक दस्तावेज पब्लिक डोमेन में नहीं है, जनता को केवल व्हाइट हाउस का संयुक्त बयान थमा दिया गया है। चिदंबरम ने पूछा कि सरकार राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पारित आदेशों और ‘सेक्शन 232’ की जांच से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है?
आर्थिक बारीकियों पर चर्चा करते हुए चिदंबरम ने चेतावनी दी कि यह सौदा भारतीय निर्यातकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 से पहले जहां टैरिफ औसतन 2 से 3 प्रतिशत थे, वहीं इस नए समझौते के बाद अमेरिका ने इसे 18 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है। चिदंबरम के अनुसार, टैरिफ में यह भारी उछाल भारत के प्रमुख क्षेत्रों जैसे समुद्री भोजन, चमड़ा उत्पाद और टेक्सटाइल उद्योग पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डालेगा। उन्होंने इस “असमरूपता” को भारत के व्यापारिक हितों की बड़ी हार करार दिया है।
चिदंबरम ने इस सौदे को भारत की “डिप्लोमैटिक जीत” कहे जाने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब सरकार के मंत्रियों को ही इस समझौते की बारीकियों की पूरी जानकारी नहीं है, तो इसे सफलता का नाम देना गलत है। चिदंबरम ने मांग की है कि बंद दरवाजों के पीछे हुई इस बातचीत का पूरा सच देश के सामने रखा जाना चाहिए। विपक्ष के इन गंभीर आरोपों के बाद अब आगामी बजट सत्र में इस ट्रेड डील पर भारी हंगामे के आसार हैं, जहाँ पारदर्शिता और विस्तृत चर्चा की मांग जोर पकड़ रही है।

