नयी दिल्ली, 09 फरवरी (वार्ता) सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए विशिष्ट श्रेणी के इस्पात के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना 1.2 की सोमवार को शुरुआत की।
योजना का उद्देश्य उच्च मूल्य वाले उन विशिष्ट श्रेणी के इस्पात के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करना है जिनके लिए इस समय हम पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं।
इस्पात एवं भारी उद्यम मंत्री एच.डी. कुमारस्वामि की मौजूदगी में यहां विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में योजना की शुरुआत की गयी। इस मौके पर कई कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किये गये।
श्री कुमारस्वामि ने कहा कि देश में विशिष्ट श्रेणी के इस्पात के निर्माण के लिए मजबूत और वैश्विक प्रतिस्पर्धी पारितंत्र तैयार करने की दिशा में पीएलआई 1.2 एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना आधुनिक और रणनीतिक इस्पात उत्पादों के लिए घरेलू क्षमता निर्माण को बढ़ावा देकर मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को बढ़ावा देती है।
मंत्रालय ने बताया कि पीएलआई 1.2 के तहत आज 55 कंपनियों के साथ 85 एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये। कंपनियों ने 11,887 करोड़ रुपये रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी। इन परियोजनाओं से वित्त वर्ष 2030-31 तक विशिष्ट श्रेणी के 87 लाख टन इस्पात निर्माण की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
इन 55 कंपनियों ने इलेक्ट्रिकल इस्पात, मिश्रधातु और स्टेनलेस स्टील, कोटिंग वाले उत्पाद और रणनीतिक सेक्टरों की जरूरत वाले इस्पात निर्माण की प्रतिबद्धता जतायी है।
मंत्रालय ने बताया कि विशिष्ट इस्पात की क्षमता विस्तार की जरूरत और उद्योगों द्वारा उनकी मांग के मद्देनजर पीएलआई योजना के तीसरे दौर की शुरुआत की गयी है। इसमें पांच साल के लिए चार प्रतिशत से 15 प्रतिशत का प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।
मंत्री ने बताया कि पीएलआई योजना के पहले और दूसरे दौर में कंपनियों ने कुल 43,874 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी थी जिसमें ज्यादातर में जमीनी स्तर पर अच्छी प्रगति हुई है।
