हरारे | अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल के बाद वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने उन्हें एक चुनौती भरा वाट्सऐप संदेश भेजा था। कोच ने मजाक में लिखा था कि शायद यह उनका पहला टूर्नामेंट होगा जिसमें वह शतक नहीं बना पाएंगे। मनीष ओझा ने बताया कि उन्होंने वैभव को आगाह किया था कि अगर फाइनल में सेट हो गए, तो बड़ी पारी खेलकर ही वापस आना। कोच की यह बात वैभव के दिल को छू गई और उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 15 चौके और 15 छक्कों की मदद से 80 गेंदों में 175 रनों की ऐसी विस्फोटक पारी खेली, जिसने अंडर-19 विश्व कप के इतिहास में तहलका मचा दिया।
इस शानदार पारी के पीछे कोच की तकनीकी सलाह का भी बड़ा हाथ रहा। मनीष ओझा ने वैभव को पुल शॉट खेलने में आ रही परेशानी को दूर करने के लिए सिर और पैर की लाइन सही रखने के टिप्स दिए थे। उन्होंने वैभव को समझाया कि ऑफ स्टंप के बाहर की शॉर्ट गेंद पर कैसे प्रहार करना है। 14 साल की उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले वैभव के बारे में कोच का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी है। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट की चकाचौंध के बावजूद वे बाहरी दुनिया के शोर से अनजान रहते हैं, जिससे उन्हें अपनी तकनीक और खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
वैभव सूर्यवंशी ने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली जैसे सीनियर स्तर के टूर्नामेंट खेलकर जो अनुभव हासिल किया, वह उनके खेल में साफ झलकता है। महज 14 साल की उम्र में सीनियर स्तर पर चार शतक जड़ने वाले वैभव मानसिक रूप से काफी परिपक्व हो चुके हैं। मनीष ओझा के अनुसार, वैभव नई बातों को बहुत जल्दी सीखते हैं और कभी अनुशासनहीनता नहीं करते। हालांकि वे मैदान पर एक आक्रामक बल्लेबाज हैं, लेकिन मैदान के बाहर वे आज भी एक छोटे बच्चे की तरह अपने परिवार के साथ रहते हैं, जो उनकी सफलता में एक मजबूत मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

