
देवसर। राष्ट्रीय राजमार्ग-39, जो जिले की यातायात व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, आज देवसर बाजार में अपनी पहचान खो चुका है।
हालात ऐसे हैं कि सड़क का नामोनिशान तक दिखाई नहीं देता। दोनों ओर ठेले, दुकानें और अस्थायी बाजार इस कदर फैल चुके हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग अब किसी ग्रामीण हाट-बाजार से कम नहीं लगता। सवाल यह है कि क्या देश के किसी और राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना इस तरह खुलेआम दुकानें सजती हैं, शायद ही कहीं ऐसा नजारा देखने को मिले। प्रशासन द्वारा कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, लेकिन वह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया। इससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों की जान भी लगातार खतरे में पड़ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना भारी वाहनों, बसों और निजी गाड़ि़यों की आवाजाही होती है। लेकिन देवसर बाजार क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों को जिगजैग तरीके से निकलना पड़ता है। सड़क किनारे खड़े ठेले, सब्जी मंडी और अस्थायी दुकानों के कारण पैदल चलने वालों और वाहनों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है। यही वजह है कि यहां आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई लोग घायल हो चुके हैं।
