नयी दिल्ली, (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने एशियन होटल्स (नॉर्थ) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के बीच हुए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (ओटीएस) की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से जांच की मांग वाली याचिका पर विचार करने के लिए बुधवार को सहमति जतायी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने ओटीएस लेनदेन की जांच की मांग करने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया था।
यह याचिका गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) इंफ्रास्ट्रक्चर वॉचडॉग द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बकाया राशि के निपटान के लिए बैंकों और एशियन होटल्स के बीच हुआ ओटीएस मौजूदा कानून और बैंकिंग मानदंडों के विपरीत था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि ओटीएस ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसके तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक के संकटग्रस्त ऋणों की नीलामी की जानी आवश्यक है।
याचिका में कहा गया है कि कोविड काल के दौरान 2021 में, कर्जदार के अनुरोध पर सभी ऋणदाता एशियन होटल्स के बकाया ऋणों के ‘वन टाइम रिस्ट्रक्चरिंग’ (ओटीआर) के लिए सहमत हुए थे। एक सितंबर, 2020 तक कुल बकाया ऋण राशि 705 करोड़ रुपये थी। उस समय होटल संपत्ति का बाजार मूल्य एक मूल्यांकनकर्ता द्वारा 2,600 करोड़ रुपये और दूसरे द्वारा 2,651 करोड़ रुपये आंका गया था।
हालांकि, जब 2024 में ओटीएस को अंतिम रूप दिया गया, तो कथित तौर पर उसी मूल्यांकनकर्ता ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अचल संपत्ति की कीमतों में महत्वपूर्ण वृद्धि के बावजूद होटल संपत्ति का बाजार मूल्य घटाकर 970 करोड़ रुपये कर दिया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि मूल्यांकन में यह भारी कमी गंभीर सवाल पैदा करती है।
प्रतिवादी बैंकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. वेंकटरमण और मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि एशियन होटल्स ने दो मौकों पर अपने होटल भवन और संपत्तियों की नीलामी करने का प्रयास किया था, लेकिन कोई खरीदार सामने नहीं आया।
श्री वेंकटरमण ने कहा कि बैंक पहले ही ऋण राशि का 116 प्रतिशत वसूल कर चुके हैं और यह याचिका एक पूरे हो चुके वाणिज्यिक लेनदेन की ‘अनावश्यक जांच’ की मांग करने के समान है। उन्होंने पीठ को सूचित किया कि स्वीकृत कुल ऋण 242.61 करोड़ रुपये था, ओटीएस के समय बही खाता शेष (लेजर बैलेंस) 226.54 करोड़ रुपये था और कुल वसूली गई राशि 414.6 करोड़ रुपये थी।
न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि यह एक वाणिज्यिक लेनदेन था जिसमें बही मूल्य (लेजर बैलेंस) पहले ही वसूला जा चुका है।
वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी ने कहा कि कर्जदार के खाते को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया था। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि एक बार खाता एनपीए घोषित होने और कर्जदार की संपत्ति का मूल्य अधिक होने पर बैंक आमतौर पर नीलामी का विकल्प चुनते हैं। पीठ को सूचित किया गया कि यह समझौता 2025 में हुआ था।
इसका संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि उस स्तर पर होटल संपत्ति की नीलामी क्यों नहीं की गई, खासकर जब कोविड के बाद रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ रही थीं। उन्होंने कहा, “दिल्ली का एक आम आदमी भी इस तथ्य पर न्यायिक संज्ञान ले सकता है कि 2023 से 2025 तक रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ रही थीं। जब आप जनवरी 2025 में समझौता कर रहे हैं, तो दिल्ली में पांच सितारा होटल का मूल्य अधिक होना निश्चित है।”
उच्चतम न्यायालय ने भारत सरकार, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और एशियन होटल्स (नॉर्थ) प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है। मामले को अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि मुकर्रर की गयी है।
