राज्य सरकार पर पच्चीस हजार की कॉस्ट के साथ अपील स्वीकृत

जबलपुर। निजी भूमि में सड़क बनाने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 25 हजार की कॉस्ट लगाई थी। इसके अलावा पीड़ित को सड़क नहीं हटाये जाने तक 15 हजार रुपये प्रतिदिन हर्जाने के तौर पर देने के निर्देश दिये थे। सरकार की तरफ से उक्त आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए प्रतिदिन हर्जाने के तौर पर 15 हजार रुपये दिये जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है। युगलपीठ ने 25 हजार रूपये की कॉस्ट को बरकरार रखा है।

रीवा मऊगंज निवासी भास्कर दत्त द्विवेदी की तरफ से निजी भूमि में सड़क बनाने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किये थे। एकलपीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि कॉस्ट तथा जुर्माने की राशि मनोज कुमार चतुर्वेदी कार्यपालन यंत्री के वेतन से वसूला जाये।

सरकार की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि रिट याचिका की सुनवाई के दौरान उप सरकारी अधिवक्ता ने मौखिक रूप से जानकारी दी थी कि याचिकाकर्ता के निजी जमीन के हिस्से में सड़क का निर्माण किया जा रहा है। हाईकोर्ट में इस संबंध में हलफनामा नहीं दायर किया गया था। मौखिक जानकारी के आधार पर एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए 24 घंटो में निजी भूमि से सड़क हटाने के आदेश जारी किये थे।

युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदक को जवाब पेश करने कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। एकलपीठ ने निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।। इसलिए अनावेदकों को प्रोसेस फ़ीस देकर अपना जवाब प्रस्तुत करने निर्देश जारी किये जा सकते थे। तीन दिनों में उप शासकीय अधिवक्ता के मौखिक निर्देश पर ही अंतिम आदेश जारी कर दिया गया। वह कानून के साथ-साथ हाई कोर्ट के नियमों के तहत उक्त आदेश टिकने लायक नहीं हैं।

इस बात से कोई खास इंकार नहीं है कि याचिकाकर्ता की निजी ज़मीन पर सड़क नहीं बन रही थी। यह तय कानून है राइट टू फेयर कम्पनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के तहत जमीन का अधिग्रहण का मुआवजा दिया जाना चाहिये था। याचिकाकर्ता को ज़मीन की सुरक्षा के लिए याचिका दायर करने मजबूर होना पडा। इसके लिए उसे 25 हजार रूपये का मुआवजा दिया जाये। जिसे ज़िम्मेदार अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर से वसूला जाएगा।

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