नयी दिल्ली 31 मई (वार्ता) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2014 से प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर देने के कारण ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया जा सका क्योंकि यह उस सरकार के बिल्कुल विपरीत था जिसने कहा था कि उसके पास रक्षा खरीद के लिए पैसे नहीं हैं।
श्रीमती सीतारमण ने यहां ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद व्याख्यान के 60 वर्ष’पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि चाहे वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हों या फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का नेतृत्व, इन दोनों प्रख्यात नेताओं के नेतृत्व में हर सरकारी नीति एकात्म मानववाद को प्रतिबिंबित करती रही है।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अनुसार राष्ट्रीय रक्षा प्रदान करना राष्ट्र के लिए मुख्य प्राथमिकताओं में से एक था। वित्त मंत्री ने कहा “ पंडित दीनदयाल उपाध्याय चाहते थे कि योजना बनाते समय हमें व्यवस्था के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को ध्यान में रखना चाहिए ताकि उसकी गरिमा को बरकरार रखते हुए उसका उत्थान किया जा सके।”
उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ वही है जो आप अंत्योदय में विश्वास करते हैं। यदि सभी को गरीबी से बाहर निकाला जाता है तो उन्हें रोजगार देना है, उन्हें एक निश्चित जीवन स्तर देना है और उन्हें मूलभूत बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच प्रदान करना है जिसके परिणामस्वरूप वे पहले की तुलना में ऊपर उठ जाते हैं और देश की उत्पादक क्षमताओं तक उनकी पहुंच अधिक हो जाती है। अंतत: देश का उत्पादन स्तर भी बढ़ता है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ‘भारतीय प्रौद्योगिकी’ के निर्माण के उद्देश्य से रोजगार सृजन के लिए नीति निर्माण में 7 ‘एम’ को शामिल करने पर जोर दिया जिनमें मैन,मनी, मटेरियल, मैनेजमेंट, मोटिव, मार्केट और मशीन शामिल है।
