नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (वार्ता) पिछले 26 अप्रैल को लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के बीच खेले गए मुक़ाबले के दौरान अंगकृष रघुवंशी को ‘ऑब्सट्र्क्टिंग द फ़ील्ड’ आउट दिए जाने का मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने समर्थन किया है।
केकेआर की पारी के पांचवें ओवर की अंतिम गेंद पर जब रघुवंशी सिंगल चुराने के दौरान आउट करार दिए गए तो वह ‘ऑब्सट्र्क्टिंग द फ़ील्ड’ आउट दिए जाने वाले आईपीएल इतिहास में केवल चौथे खिलाड़ी बने। यह घटना तब घटी जब केकेआर की पारी के पांचवें ओवर की अंतिम गेंद पर रघुवंशी मिडऑन पर खेलकर रन के लिए दौड़े थे और उनके जोड़ीदारन कैमरन ग्रीन ने उन्हें वापस भेजा था। रघुवंशी ने रन लेने के लिए पिच की ऑफ़ साइड से दौड़ना शुरू किया था और फिर वह पिच की बीच में आ गए और फिर वापस जाने के क्रम में वह लेग साइड में चले गए और जब उन्होंने ख़ुद को बचाने के लिए डाइव लगाया तब गेंद उनके शरीर को जा लगी। एलएसजी के फ़ील्डरों द्वारा अपील किए जाने के बाद थर्ड अंपायर रोहन पंडित ने उन्हें आईसीसी के लॉ 37 के तहत ‘ऑब्सट्र्क्टिंग द फ़ील्ड’ आउट करार दिया।
एमसीसी ने गुरुवार को जारी किए अपने स्पष्टीकरण में लॉ 37.1.1 का हवाला दिया है जिसके अनुसार यदि कोई बल्लेबाज़ अपने शब्दों या कार्यों के ज़रिए फ़ील्डिंग दल को जानबूझकर बाधित करने या भटकाने का प्रयास करता है तो वह ‘ऑब्सट्र्क्टिंग द फ़ील्ड’ आउट माना जाएगा। चूंकि बाधा डाले जाने के जानबूझकर किए गए कृत्य को निर्धारित करना कठिन है इसलिए एमसीसी ने टॉम स्मिथ की पुस्तक ‘क्रिकेट अंपायरिंग एंड स्कोरिंग’ में प्रकाशित व्याख्या का हवाला दिया जो कि क्रिकेट नियमों से संबंधित एमसीसी की औपचारिक व्याख्या रही है।
इसमें कहा गया है: “जो बल्लेबाज़ दौड़ते समय दिशा बदलता है, विशेषकर पिच पर दौड़ने के लिए दिशा बदलता है, या दूसरे छोर तक पहुंचने के लिए सबसे तेज़ रास्ते के अलावा कोई और रास्ता अपनाता है तो यह जानबूझकर किया गया कृत्य है।”
एमसीसी के अनुसार रघुवंशी ने उपरोक्त मानदंडों को पूरा किया। बयान में आगे कहा गया है कि रघुवंशी का पिच के बीच में दौड़ना ऐसी जगह थी जहां उन्हें किसी भी परिस्थिति में नहीं दौड़ना चाहिए था। और वह ऑफ़ साइड से लेग साइड में चले गए जिससे वह गेंद और विकेट के बीच में आ गए। एमसीसी ने कहा, “परिभाषा के अनुसार यह जानबूझकर किया गया कृत्य है।”
स्पष्टीकरण में आगे कहा गया है कि अगर रघुवंशी ऑफ़ साइड में ही रहते तो गेंद उन्हें लगती ही नहीं और फिर बाधा डालने का सवाल ही नहीं उठता। एमसीसी के बयान में कहा गया, “पिच को जानबूझकर पार करना ही उनके आउट होने का कारण बना।”
एमसीसी ने यह भी कहा कि रघुवंशी क्रीज़ तक पहुंचे थे या नहीं यह सवाल उठता ही नहीं क्योंकि “आउट होने की संभावना थी या नहीं, यह फ़ील्डिंग में बाधा डालने का मापदंड है ही नहीं।”
रघुवंशी का इस तरह आउट होना चर्चा का विषय बन गया था और केकेआर का सपोर्ट स्टाफ़ इस फ़ैसले से नाख़ुश भी नज़र आया। मुख्य कोच अभिषेक नायर को भी चौथे अंपायर से बात करते देखा गया। रघुवंशी ने भी अपनी नाराज़गी व्यक्त की और वह बल्ले को लहराते हुए और अंत में बाउंड्री कुशन पर बल्ला पटकते हुए मैदान के बाहर चले गए और अपना हेलमेट फेंक दिया। उन्हें आईसीसी के आचार संहिता के उल्लंघन के लिए मैच फ़ीस का 20 फ़ीसदी जुर्माना भी लगाया गया और उनके खाते में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ा गया। हालांकि यह मुक़ाबला केकेआर ने सुपर ओवर में अपने नाम कर लिया।
