बिजली खरीदी व आपूर्ति पर दो प्रक्रियाओं से वसूली पर आपत्ति

हाईकोर्ट में एनयूएमएम की ओर से दायर की गई याचिका

जबलपुर। हाईकोर्ट में एक याचिका के जरिए एक ही बिंदु बिजली खरीदी व आपूर्ति में दो प्रक्रियाओं से वसूली पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। यह कदम मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियमाक आयोग द्वारा नो कामेंट जैसी प्रतिक्रिया दिये जाने के उपरांत उठाया गया है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने अवगत कराया कि नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्श मंच जबलपुर के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव व्यापक जनहित में हाईकोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने पूर्व में प्रस्तुत फ्यूल सर चार्ज के सिलसिले में दायर याचिका में संशोधन हेतु हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

दरअसल, बिजली कम्पनियों द्वारा बिजली रेट बढ़ाने हेतु वार्षिक राजस्व आवश्यकता रिपोर्ट (एआरआर) में रेट निर्धारण हेतु बिजली खरीदी व बिजली आपूर्ति की लागत बताई गई है। यही बिन्दु फ्यूल सरचार्ज के निर्धारण में भी शामिल किया गया है। अत: एक ही बिन्दु पर दो प्रक्रियाओं से दो बार वसूली करना कानूनन गलत है। जब तक इस कानूनी मुद्दे का निराकरण नहीं किया जाता हैए तब तक आयोग को वर्ष 2025-2026 बिजली दर निर्धारण पर रोक लगाना चाहिये। यह आपत्ति विद्युत नियामक आयोग को भेजी थी। लेकिन विद्युत नियामक आयोग ने इस आपत्ति पर केवल नो कमेंट कहा है। साथ ही बिजली दर निर्धारण प्रक्रिया जारी रखी है। यदि आपत्ति पर आयोग अनावेदक नो कमेंट कहता है तो यह माना जाना चाहिये की याचिका कर्ताओं की आपत्ति सही है। मामले में जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है।

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