मुंबई, 30 अप्रैल (वार्ता) वेबसीरिज़ ‘हीरामंडी’ के प्रदर्शन के आज दो साल पूरेहो गये हैं। ‘हीरामंडी’ भले ही ताहा शाह बदुशा के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना, लेकिन उनकी शुरुआत इससे काफी पहले ‘लव का दी एंड’ से हुई थी। एक नए चेहरे के तौर पर उन्होंने अपनी क्षमता की झलक जरूर दिखाई, लेकिन जैसा अक्सर होता है, शुरुआती पहचान लंबे समय तक सफलता की गारंटी नहीं बनती। इसके बाद उन्होंने एक अनिश्चित इंडस्ट्री में अपने लिए रास्ता बनाते हुए कई उतार-चढ़ाव देखे, जिनमें कभी काम और कभी ठहराव के साथ शामिल थी बिना किसी पक्की पहचान के आगे बढ़ते रहने का जज़्बा।
यही वजह है कि संजय लीला भंसाली जैसे फिल्ममेकर की ‘हीरामंडी’ में उनका कास्ट होना खास मायने रखता है। भंसाली अपने बारीक विज़न और गहरी कहानी कहने के लिए जाने जाते हैं, जहां कलाकारों से एक अलग स्तर की गहराई की उम्मीद की जाती है। ऐसे में ताहा की मौजूदगी वहां संयोग नहीं थी, बल्कि यह उनके वर्षों के धैर्य और अपने काम के प्रति समर्पण का परिणाम था। यही वजह है कि आज दो साल बाद भी, जब दर्शक ‘हीरामंडी’ में उनके किरदार को याद करते हैं, तो यह बात साफ हो जाती है कि ताहा की सफलता रातों रात मिली सफलता का परिणाम नहीं, बल्कि एक लंबे सफर का निष्कर्ष था। बस बात इतनी सी है कि दर्शकों ने उन्हें तब पहचाना, लेकिन उस पहचान की नींव काफी पहले रखी जा चुकी थी।

