जाली डॉक्टर कांड में नया खुलासा: 2012 में चोरी हुई थी मार्कशीट

जबलपुर: मार्बल सिटी हॉस्पिटल में जालसाजी कर डॉक्टर बना सतेन्द्र ने डॉ. ब्रजराज उइके के नाम पर सेवाएं दी। उसने कटनी निवासी अपने दोस्त की कक्षा 12वीं की मार्कशीट का गलत तरीके से इस्तेमाल किया था। फर्जीवाड़े में नया खुलासा हुआ है कि कटनी निवासी ब्रजराज की अंकसूची 2012 में चोरी हुई थी। जिसकी शिकायत उसने स्थानीय थाने में भी की थी। सूत्रों की माने तो पहले सतेन्द्र ने बृजराज की तस्वीर बदली फिर उसकी फर्जी अंकसूची तैयार करने के बाद फर्जीवाड़ा किया है।सतेन्द्र मूलत: प्रयागराज का रहने वाला है जिसके पिता रेलवे में थे। पढ़ाई प्रयागराज में की थी। इसके बाद सतेन्द्र और ब्रजराज में दोस्ती हुई थी। हाईस्कूल के बाद की पढ़ाई सतेन्द्र ने कटनी में ही बृजराज के साथ की थी।

विदित हो कि मनोज कुमार महावर पिता जगनलाल महावर 36 वर्ष निवासी डीरेल सौरभ आफीसर ने बताया कि 1 सितम्बर 24 को मां शांति देवी को बुखार और सांस लेने मेंं तकलीफ शिकायत हुई। उन्हें मार्बल सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। 2 सितम्बर 24 को मौत हो गई। जब मौत का कारण जााने का प्रयास किया तो अस्पताल द्वारा बताया गया कि वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं, लेकिन उसने वेटिलेटर सपोर्ट के लिए सहमति देने से मना कर दिया था। अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार यह कहा गया कि डॉ. ब्रजराज सिंह उइके ने 1 सितम्बर की रात्रि 11 बजे, दो सितम्बर को सुबह एक बजे और साढ़े चार बजे आईसीसीयू में मां की स्थिति का आंकलन किया।

वेटिलेटर सपोर्ट के लिए सहमति मांगी जिसे अस्वीकार कर दिया, लेकिन सच्चाई यह है कि डॉ ब्रजराज सिंह उइके ने मां का इलाज करने के लिए आईसीयू में कोई विजिट ही नहीं किया। वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए कोई चर्चा या सहमति नहीं मांगी। स्टॉफ से उइके के बारे मेें पूछा तो किसी ने भी उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अपने स्तर पर खोजबीन शुरू की। जानकारी कटनी निवासी दोस्त को भेजी। इसके बाद पता चला कि ब्रजराज नाम का व्यक्ति डॉक्टर नहीं, पेंटर है। डॉक्टर डिटेल पर जो फोटो लगा था वह उनका नही है। फोटो उनके दोस्त सत्येन्द्र की है जो उसके साथ पढ़ा था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन से अनुरोध किया मुझे डॉ ब्रजराज सिंह उडक़े से मिलवाएं, लेकिन न मिलवाने केलिए बहानेबाजी करते रहे।

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