20 साल से तालाब में जमी सिल्ट बनी सिरदर्द

जबलपुर:करीब 20 साल गुजर गए.न कभी हनुमानताल तालाब की सफाई का मुहूर्त निकला और न कभी किसी जनप्रतिनिधि ने हनुमानताल तालाब के सौंदर्यीकरण की ओर ध्यान दिया.. लेकिन आज से जब 3 माह पहले विधायक अभिलाष पांडे की पहल पर हनुमानताल तालाब के सौंदर्यीकरण की बात सामने आते हुए धरातल पर कार्य शुरू हुए तो लोगों को लगा कि हां अब सब ठीक होगा लेकिन जिम्मेदार ठेकेदार व नगर निगम प्रशासन के उदासीन अधिकारी- कर्मचारी इन दिनों तालाब के सौंदर्यीकरण में चार चांद लगाने की बजाय उसमें पलीता लगाने जुटे हैं।

जिसका नतीजा है तालाब की सतह पर जमी सिल्ट अभी भी पूरी तरह से नहीं निकली है और सिर पर मानसून है।जानकारों की माने तो अगले कुछ दिनों में ही जबलपुर में मानसून पूरी तरह से एक्टिव होकर दस्तक दे देगा, जिसके बाद हनुमानताल तालाब में सफाई का काम फिर से अधूरा ही रह जाएगा। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। बारिश के पहले अब वो कैसे तालाब की सफाई के काम को अंजाम देंगे। आपको बता दें कि 3 माह में भी जिम्मेदारों द्वारा हनुमानताल तालाब के सौंदर्यीकरण का काम पूरा नहीं कराया जा सका है। विदित हो कि तालाब की सिल्ट जब तक पूरी निकाल दी जाएगी तो बारिश में तालाब के पानी को जमीन अवशेाषित करना शुरू कर देगी। जानकारी के अनुसार हनुमानताल तालाब की सफाई के कार्य इन दिनों बहुत धीमी गति से चल रहा है। कहीं बारिश लगातार होने लगेगी तो फिर तालाब की सफाई धरी की धरी रह जाएगी।
बोरिंग का गिर रहा जलस्तर
हनुमानताल तालाब के पास रहने वाले आकाश, नवीन दुबे, सोमेल, राजू, संगीताबाई सहित अन्य ने नवभारत से कहा कि कई सालों से हनुमानताल तालाब की सफाई न होने की वजह से पहले तालाब पानी नहीं सोख रहा था जिस कारण तालाब के आसपास रहने वाले घरों की बोरिंग का जल स्तर गिर रहा था।इन लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें नगर निगम प्रशासन, विधायक अभिलाष पांडे व तालाब की सफाई करने वाले ठेकेदार से बहुत उम्मीद है कि हनुमानताल तालाब की अब ठीक ढंग से सफाई जल्द से जल्द बारिश के पहले की जाए और तालाब के अंदर जमा सारी सिल्ट को खोदकर बाहर निकाला जाए।

ऐसा करने से बारिश का पानी जमीन सोख लेगी और फिर बोरिंग का जलस्तर भी बढ़ जाएगा। जानकारी के अनुसार हनुमानताल तालाब के आसपास करीब 500 मीटर क्षेत्र में स्थित घरों में मौजूद बोरिंग में पानी की पर्याप्त मात्रा होती है। स्थानीय रहवासियों को अब ये भी चिंता सता रही है कि कहीं सौंदर्यीकरण के दिखावे में खानापूर्ति करके उनके घरों की बोरिंग न सूख जाए क्योंकि अगर काम में लापरवाही बरती गई तो वो दिन दूर नहीं जब बोरिंग भी सूखने लगेगी।

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