इंदौर: शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमारी फैलने के बाद भी नई पाइपलाइन डालने में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच, स्थानीय लोग भयभीत हैं और प्रशासन व नेताओं पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता और पाइपलाइन की स्थिति को लेकर गहरी चिंता और आक्रोश है. यहां के रहवासी दूषित पानी से मौतें और सिस्टम की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण बीमारियां फैलीं और लैब रिपोर्ट में पानी में घातक बैक्टीरिया पाए गए, जिससे लोगों की जान को खतरा है. नई पाइपलाइन डालने के काम में देरी और अनदेखी की जा रही है, जिससे लोगों में अधिकारियों और नेताओं के प्रति अविश्वास है. लोग बाहर से चुप दिख रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उनमें भारी गुस्सा है और वे पाइपलाइन के काम में भ्रष्टाचार की आशंका जता रहे हैं. इस त्रासदी ने सिस्टम से जवाब मांगा है, क्योंकि जिस पानी से जीवन चलता है, वही मौत का कारण बन गया है. यह स्थिति भागीरथपुरा के निवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, जहां पानी की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिख रही है और लोग जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान चाहते हैं.
करीब दो हफ्ते बाद क्षेत्र में कुछ सामान्य स्थिति की बात की जा रही है, लेकिन नवभारत द्वारा क्षेत्र का जायजा लेने पर कई बातें सामने आई हैं. पाइप लाईन में लीकेज ढूंढने के लिए क्षेत्र में सीवरेज लाईन के पाईंट चेक किए जा रहे हैं, जहां सीवरेज लाईन बदली जा रही है, वहां देखा गया कि नगर निगम के बजट में बड़े पाईप पास किए गए, लेकिन साथ में छोटे पाईप भी डाले जा रहे हैं, जिससे आसपास के लोगों ने नाराजगी जाताई है. इसमें रहवासियों को भ्रष्टाचार का संदेह हो रहा है.
दूसरी ओर, जहां क्षेत्र में डॉक्टरों की टीम हर गली में घर-घर घूम रही थी, अब वह भी कम होती नजर आ रही है. जिन मरीजों की असपताल से छुट्टी हो चुकी है, अभी वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं. क्षेत्र में पानी की पूर्ति के लिए छोटे-बड़े पानी के 50 टैंकर लगा रखे हैं, जो पानी की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं. कई गलियों में टैंकर पहुंच ही नहीं रहा. जबकि घटना के बाद दो सौ टैंकर क्षेत्र में पानी वितरण कर रहे थे. निगम ने इसमें भी कटौती कर दी है. पानी को लेकर अब भी लोगों में बहुत ही डर देखने को मिल रहा है. लोग आरओ का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि निगम टैंकर का पानी दूसरे कार्यों में काम ले रहे हैं.
यह बोले रहवासी
कार्य तो अच्छा चल रहा है, लेकिन जो पाईप हैं, वह भविष्य को देखते हुए बड़े डलने चाहिए, नहीं तो 5-6 साल बाद दोबारा समस्या बन सकती है. कार्य में गति भी लाई जाए, लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
– राहुल बिंजवा
कहीं सीवरेज या पानी की लाईन लीकेज न हो, इसके लिए आगे से अब समय-समय पर लाईन की जांच करनी चाहिए. दोबारा ऐसा हादसा न हो, इसे ध्यान में रखकर पानी और सीवरेज की लाईन डालना चाहिए.
– देवेंद्र सांवलिया
पीने के पानी को लेकर सभी में डर बना हुआ है, निगम जो पानी के टैंकर क्षेत्र में पहुंचा रहा है, हम उसका पानी दूसरे काम में ले रहे हैं, पीने के लिए आरओ का पानी खरीदकर में ले रहे हैं.
– शकुंतला कटारिया
क्षेत्र में अधिकारी तो आ रहे हं,ै डॉक्टर भी आ जाते हैं, पूछते हैं कोई बीमार तो नहीं पहले तो डॉक्टर यहीं बैठते थे, अब नहीं आ रहे हैं. पानी के नल तो बिलकुल बंद कर रखे हैं.
– रती बाई
नर्मदा पाइप लाईन और सीवरेज पाईंट चेक कर रहे हैं. पहले तो सफाई नहीं होती थी, घटना के बाद से तो सभी दूर कार्य चल रहा है. अभी चार दिन पहले ही घरों के पीछे की लाईन साफ कर दी गई है.
– कमल कुशवाहा
पहले ही क्षेत्र में सफाई और ध्यान रखते तो ऐसी दु:खद घटना नहीं होती, कितने लोग दुनिया से चले गए. दूषित पानी पीने से मैं खुद भी पांच दिन अस्पताल में भरती रही हूं, अभी कमजोरी बहुत ज़्यादा है.
– मोहिनी तेंदोरिया
मेरे घर में दो लोग अभी भी बीमार हैं, मेरा पेट अभी तक फूला हुआ है, मर गए तो कौन उठाने आएगा. यहां अपने-अपने चहेतों को सुविधा पहुंचाते रहे हैं, किस को बोलें किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता.
– गर्वेश दानी
राजू भटकारे वाली गली में कई लोगों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है. निगम के टैंकर सीधे निकल जाते हैं, रोको तो रुकते भी नहीं हैं, अधिकारी को कहो तो वह भी नहीं सुनते.
– ममता मांगले
