मुंबई | बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित आवास पर हुई फायरिंग की घटना ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि इस हमले के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ है। हमलावरों ने वारदात से पहले करीब 10 दिनों तक रोहित के घर की रेकी की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पुराने स्कूटर से रेकी की गई, उसी का इस्तेमाल फायरिंग के बाद भागने के लिए भी किया गया। शूटर ने घर के बाहर पांच राउंड गोलियां बरसाईं और फिर विले पार्ले स्टेशन पर स्कूटर लावारिस छोड़कर ट्रेन के जरिए फरार हो गया।
पुलिस जांच के अनुसार, वारदात में इस्तेमाल स्कूटर पुणे के आनंद मारोटे से मात्र 30 हजार रुपये में खरीदा गया था। इस सौदे के लिए पैसे मास्टरमाइंड शुभम लोनकर ने दिए थे। आरोपी आदित्य गायकवाड़, सिद्धार्थ येनपुरे और स्वप्नील सकट ने इस स्कूटर को पुणे से लोनावला और फिर मुंबई पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। आरोपियों को इस काम के लिए अलग से मोटी रकम दी गई थी। हालांकि, गिरफ्तार किए गए सहयोगियों ने दावा किया है कि उन्हें आपराधिक गतिविधि की जानकारी तो थी, लेकिन उनका निशाना रोहित शेट्टी का घर होगा, इस बात से वे अनजान थे।
क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है कि पूरी साजिश की प्लानिंग एन्क्रिप्टेड ‘सिग्नल ऐप’ के जरिए की गई थी। आरोपी समर्थ पोमाजी लगातार शुभम लोनकर के संपर्क में था और उसी के डिजिटल निर्देशों पर काम कर रहा था। पुलिस ने अब तक आदित्य गायकवाड़ सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य मास्टरमाइंड शुभम लोनकर अभी भी फरार है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि फिल्म इंडस्ट्री में डर पैदा करने के पीछे बिश्नोई गैंग का असल मकसद क्या था। आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

