
पचमढ़ी।मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में अब साहसिक खेलों को नई दिशा मिलती दिख रही है, जहां पर्वतारोही राकेश धुर्वे बच्चों को निशुल्क रॉक क्लाइम्बिंग से जुड़ी ट्रेनिंग देकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दे रहे हैं। यह पहल पचमढ़ी में एडवेंचर स्पोर्ट्स कल्चर को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
पचमढ़ी में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है—जहां बच्चों को निःशुल्क रॉक क्लाइम्बिंग और माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है।
पचमढ़ी में साहसिक खेलों को प्रोत्साहन देने आगे आए माउंटेनियर राकेश धुर्वे—बच्चों को रॉक क्लाइम्बिंग, रैपलिंग, लीड क्लाइम्बिंग और बोल्ड्रिंग की फ्री ट्रेनिंग।
पचमढ़ी के सतपुड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक क्लाइम्बिंग एंड माउंटेनियरिंग फाउंडेशन के डायरेक्टर और पर्वतारोही राकेश धुर्वे अब बच्चों में साहसिक खेल भावना जगाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
राकेश धुर्वे उन बच्चों तक पहुंच रहे हैं जो एडवेंचर स्पोर्ट्स के बारे में कम जानते हैं या संसाधनों के अभाव में ट्रेनिंग नहीं ले पाते।
खास बात यह है कि वे स्कूलों में जाकर, जरूरत पड़ने पर बच्चों के घर पहुंचकर माता-पिता से सहमति लेते हैं और फिर बच्चों को रॉक क्राइम्बिंग, रैपलिंग, लीड क्लाइम्बिंग और बोल्ड्रिंग जैसी तकनीकों की बेसिक से एडवांस ट्रेनिंग निःशुल्क देते हैं।
पचमढ़ी जैसे पर्यटन स्थल पर साहसिक खेलों की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसी कड़ी में रॉक क्लाइम्बिंग जैसे आयोजन भी क्षेत्र में एडवेंचर को आगे ले जा रहे हैं।
राकेश धुर्वे की यह मुहिम निश्चित तौर पर बच्चों को नई पहचान देने के साथ-साथ पचमढ़ी को एडवेंचर स्पोर्ट्स मैप पर और मजबूत कर सकती है।
पर्वतारोही राकेश धुर्वे ने बताया कि मेरा प्रयास है कि पचमढ़ी से ऐसे अच्छे पर्वतारोही तैयार हों जो आगे चलकर प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पचमढ़ी का नाम रोशन कर सकें अगर एक प्रयास से किसी बच्चे का भविष्य बन सके, तो मेरी मेहनत सफल है। एक छोटे से गांव बारीआम से रहने वाला पर्वतारोही राकेश धुर्वे गांव गांव जाकर एवं नगरीय क्षेत्र के गरीब बच्चों को निःशुल्क रॉक क्लाइंबिंग एवं आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दे रहा है ऐसे पर्वतारोही को शासन स्तर पर सहयोग मिलना चाहिए।
