मुंबई, 31 जुलाई (वार्ता) फिल्म ‘शकुंतला देवी’ को रिलीज हुए छह साल पूरे हो गए हैं, लेकिन गणितज्ञ शकुंतला देवी के रूप में विद्या बालन का अभिनय आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।विद्या बालन ने इस फिल्म में शकुंतला देवी की असाधारण गणितीय प्रतिभा के साथ-साथ उनके मानवीय और भावनात्मक पक्ष को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने एक आत्मविश्वासी, बेबाक और अपनी शर्तों पर जीवन जीने वाली महिला के साथ-साथ अपनी बेटी के साथ रिश्तों को समझने की कोशिश करती एक मां के किरदार को भी सहजता से निभाया। फिल्म में विद्या ने शकुंतला देवी के सार्वजनिक और निजी जीवन के बीच संतुलन को बखूबी उभारा।
मंच पर उनका आत्मविश्वास और हास्यबोध जहां दर्शकों को आकर्षित करता है, वहीं निजी जीवन में रिश्तों को लेकर उनकी भावनात्मक उलझनें, असुरक्षा और पछतावा भी उतनी ही सच्चाई से सामने आते हैं। ‘शकुंतला देवी’ की खासियत यह रही कि इसमें महान गणितज्ञ को केवल उनकी उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि एक इंसान के रूप में भी दिखाया गया। विद्या बालन ने इस बहुआयामी व्यक्तित्व को संवेदनशीलता और गहराई के साथ पर्दे पर उतारा, जिससे दर्शक उनके जीवन और संघर्षों से जुड़ सके। छह साल बाद भी यह फिल्म और विद्या बालन का अभिनय इस बात का उदाहरण है कि किसी महान शख्सियत की कहानी उसकी उपलब्धियों के साथ-साथ उसके मानवीय रिश्तों और भावनाओं से भी बनती है।

