सारनी: जिले की सबसे बड़ी नगर पालिका सारनी में इन दिनों पार्षद पतियों का प्रभाव चर्चा का विषय बना हुआ है. झुग्गी-झोपड़ी महासंघ के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इलियास ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका के कई वार्डों में निर्माण कार्य, साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था जैसे मामलों में निर्वाचित महिला पार्षदों की बजाय उनके पति सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.उन्होंने कहा कि नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी भी पार्षद पतियों के हस्तक्षेप और दबाव से परेशान हैं.
इलियास के मुताबिक कई पार्षद पति वार्डों के कार्यों में अनावश्यक दखल देने के साथ जातिवाद और दलगत राजनीति को भी बढ़ावा दे रहे हैं. उनका आरोप है कि यह स्थिति कोई नई नहीं है, बल्कि वर्षों से नगर पालिका के कामकाज में पार्षद पतियों की दखलअंदाजी जारी है और इसकी शिकायतें भी समय-समय पर होती रही हैं.
मोहम्मद इलियास ने कहा कि शासन ने महिलाओं को राजनीति में भागीदारी देने के उद्देश्य से नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है.
सारनी नगर पालिका के 36 वार्डों में 18 महिला पार्षद निर्वाचित हुई हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में उनकी जगह उनके पति जिम्मेदारियां निभाते नजर आते हैं. उन्होंने दावा किया कि महिला पार्षद परिषद बैठकों के बाद शायद ही नगर पालिका कार्यालय या वार्डों में दिखाई देती हैं.उन्होंने कहा कि महिलाओं को दिया गया आरक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है. पार्षद पतियों की कथित मनमानी और नगर पालिका कार्यों में हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग को लेकर जल्द ही नगर पालिका सीएमओ और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
