ग्रेट निकोबार में पारिस्थितिकी की अनदेखी कर सरकार चला रही है विकास परियोजना : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 02 जनवरी (वार्ता) कांग्रेस ने अरावली में सरकारी नीतियों के कारण प्रदूषण संकट पर सवाल उठाने के साथ कहा है कि निकोबार में भी सरकार पारिस्थितिकी की परवाह किये बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाएं चला रही है जो विकास के नाम पर पारिस्थितिकी तंत्र को ध्वस्त करने वाली हैं।

कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने कुछ माह पहले ‘ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट’ को अनावश्यक बताते हुए कहा था कि इस परियोजना पर सरकार 72,000 करोड़ रुपये खर्च कर गलत कर रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना द्वीप के मूल आदिवासी समुदायों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा राहुल गांधी ने भी इस परियोजना को पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक बताया था।

शुक्रवार को पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने फिर यह मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में सरकार ने विकास के नाम पर हज़ारों करोड़ रुपये की आक्रामक परियोजनाओं को जिस लालच और नासमझी के चलते जल्दबाज़ी से मंजूरी दी है, वह पूरे इलाके के लिए एक ख़तरनाक और दीर्घकालिक त्रासदी साबित होने वाली है।

उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ न सिर्फ़ वहां की नाज़ुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय नुकसान पहुँचाएंगी, बल्कि आदिवासी समुदायों के अस्तित्व को भी योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलेंगी।

यह पूरा इलाका पहले से ही जलवायु आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जहां प्राकृतिक संतुलन से ज़रा-सी भी छेड़छाड़ विनाशकारी परिणाम ला सकती है। इसके बावजूद सरकार ने चेतावनियों, वैज्ञानिक आकलनों और स्थानीय वास्तविकताओं को नज़रअंदाज़ करते हुए चंद कॉरपोरेट के मुनाफ़े के लालच में इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पंकज सेखसरिया द्वारा संकलित ‘ग्रेट निकोबार : कहानी विश्वासघात की’ कई शोधपरक, तथ्यात्मक और प्रासंगिक लेखों के माध्यम से इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका, नीतिगत लापरवाहियों और आदिवासी अधिकारों के साथ किए जा रहे समझौतों की समीचीन पड़ताल करती है। यह संकलन इस बात का जीता-जागता दस्तावेज़ी साक्ष्य है कि कैसे विकास के नाम पर एक पूरे क्षेत्र और उसके लोगों के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया है।”

श्री रमेश ने इसके साथ ही इस पुस्तक का लिंक भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।

 

 

 

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