
मण्डला। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित मण्डला एवं अल्प बचत साख सहकारी समिति मण्डला में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने मामले में अपराध क्रमांक 168/2025 दर्ज कर चार पदाधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। आरोप है कि ऋण उप समिति की बैठक में अस्वीकृत प्रकरण के दस्तावेजों से “अ” हटाकर उसे स्वीकृत दर्शाया गया और 65 लाख रुपये की अल्प अकृषि ऋण साख सीमा अवैधानिक रूप से मंजूर कर बैंक को भारी आर्थिक हानि पहुंचाई गई।
ईओडब्ल्यू को प्राप्त शिकायत में बताया गया था कि अल्प बचत साख सहकारी समिति मर्यादित मण्डला द्वारा अमानतदारों की राशि वापस नहीं की जा रही, अनुचित ऋण स्वीकृतियां दी जा रही हैं तथा वसूली में घोर लापरवाही के साथ गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। जांच में खुलासा हुआ कि 08.11.2011 को जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मण्डला की ऋण उप समिति की बैठक में समिति पर 38 लाख रुपये का ओवरड्यू (बकाया) होने के कारण प्रकरण को अस्वीकृत किया गया था। लेकिन बैठक के बाद दस्तावेजों में कूटरचना कर अस्वीकृत शब्द से “अ” हटाया गया और अंतिम पंक्ति जोड़कर 65.00 लाख रुपये की अल्प अकृषि ऋण साख सीमा स्वीकृत दर्शा दी गई।
जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन महाप्रबंधक नरेन्द्र कोरी ने इस तथ्य को जानबूझकर छुपाया कि बैठक के मात्र तीन दिन बाद 12.11.2011 को उनके हस्ताक्षर से कृषि शाखा मण्डला को आदेश जारी कर अल्प बचत साख सहकारी समिति मण्डला को 65 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर दिया गया और उक्त राशि सदस्यों में वितरित कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में पद का दुरुपयोग, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र के माध्यम से बैंक को 65 लाख रुपये की हानि कारित होना प्रमाणित पाया गया।
इसके अलावा जांच में यह भी उजागर हुआ कि वर्तमान प्रबंधक शशि चौधरी के कार्यकाल में समिति की उपविधि क्रमांक 13 के विपरीत गैर सदस्यों से 26,68,436 रुपये की राशि अवैधानिक रूप से प्राप्त की गई, जो स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्रकरण में नरेन्द्र कोरी (तत्कालीन महाप्रबंधक), एन. एल. यादव (तत्कालीन स्थापना प्रभारी), अतुल दुबे (तत्कालीन लेखापाल व पंजी फील्ड कक्ष प्रभारी) तथा शशि चौधरी (प्रबंधक, अल्प बचत साख सहकारी समिति मण्डला) को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों के विरुद्ध धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी भादवि एवं 7(सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
यह कार्रवाई सहकारिता क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर कड़ा प्रहार मानी जा रही है। ईओडब्ल्यू की इस जांच से यह स्पष्ट संदेश गया है कि वित्तीय संस्थानों में पद का दुरुपयोग कर की गई धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई तय है।
